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खबरों के खिलाड़ी
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
Khabron Ke Khiladi: डिजिटल प्लेटफॉर्म के पसंदीदा कार्यक्रम ‘खबरों के खिलाड़ी’ में एक बार फिर आपका स्वागत है। हफ्ते की बड़ी खबरों और राजनीतिक घटनाक्रम के सधे विश्लेषण के साथ हम आपके सामने प्रस्तुत हैं। यह राजनीतिक चर्चा अमर उजाला के यूट्यूब चैनल पर लाइव हो चुकी है।
मीडिया में इन दिनों महिला पहलवानों के धरने प्रदर्शन का मुद्दा छाया हुआ है। बीते दिनों जिस तरह से दिल्ली पुलिस ने पहलवानों के खिलाफ कार्रवाई की, उसने इस मामले को गरमा दिया। कई लोग पहलवानों के समर्थन में आ गए हैं और सरकार से मामले में जल्द कार्रवाई की मांग की जा रही है। साथ ही इस मामले का असर देश की राजनीति पर भी हो रहा है। इस अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए इस बार हमारे साथ रामकृपाल सिंह, विनोद अग्निहोत्री, सुमित अवस्थी, पूर्णिमा त्रिपाठी, शुभ्रास्था शिखा और शिवम त्यागी जैसे विश्लेषक मौजूद रहे। पढ़िए चर्चा के कुछ अंश…
सुमित अवस्थी
‘महिला पहलवानों के मुद्दे पर सरकार का संवेदनशील ना होना कई सवाल खड़े कर रहा है। सरकार की तरफ से किसी ने प्रदर्शन कर रहे पहलवानों से बात करने की कोशिश नहीं की। जो पार्टी महिलाओं को आगे बढ़ाने और पढ़ाने की बात कर रही है, वह पार्टी एक चेहरे के आगे क्यों नतमस्तक है! आखिर सरकार की क्या मजबूरी है? बृजभूषण शरण सिंह को बचाया जा रहा है और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि खराब हो रही है। इस पूरे मामले को लेकर सरकार के खिलाफ आमजन में गलत अवधारणा बन रही है। इस अवधारणा को तोड़ने के लिए सरकार का कार्रवाई करना जरूरी हो गया है, वरना सरकार विपक्ष के हाथ में बड़ा मुद्दा दे देगी। कुलदीप सिंह सेंगर और एमजे अकबर के उदाहरण हैं कि भाजपा ने तुरंत कार्रवाई की, लेकिन बृजभूषण मामले पर भाजपा क्यों मजबूर दिख रही है, ये बड़ा सवाल है।’
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