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2024 Lok Sabha elections
– फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht
विस्तार
क्या लोकसभा चुनाव अपने तय वक्त से पहले हो सकते हैं? क्या उन्हें इसी साल नवंबर-दिसंबर में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनावों के साथ कराया जा सकता है? क्या मोदी सरकार की नौ साल की उपलब्धियों के प्रचार पर जोर इसका संकेत है? यह चर्चाएं और सवाल इन दिनों सियासी गलियारों की कानाफूसी में तैरने लगे हैं। हालांकि अभी यह बातें सत्ता और सियासत के गलियारों में आम नहीं हुई हैं, लेकिन सत्ता के उच्च स्तर पर कुछ खास लोगों ने इस तरह के संकेत देने शुरू कर दिए हैं कि सरकार और भाजपा के शीर्षस्थ स्तर पर इसे लेकर न सिर्फ मंथन चल रहा है, बल्कि यह आकलन भी हो रहा है कि लोकसभा और चार राज्यों के विधानसभा चुनावों को साथ कराने में कितना सियासी फायदा या नुकसान है।
वैसे तो भाजपा नेता अकसर कहते हैं कि उनका दल किसी भी वक्त चुनाव के लिए तैयार रहता है, लेकिन इन दिनों जिस तरह भारतीय जनता पार्टी में जिस तरह शीर्ष स्तर पर बैठकों का दौर चल रहा है, मंत्रियों और सांसदों को जिले-जिले भेजकर मोदी सरकार के नौ साल की उपलब्धियों का प्रचार किया जा रहा है और प्रचार का सारा जोर मोदी सरकार के नौ साल के नारे पर है, उससे संकेत हैं कि भाजपा किसी भी समय (समय से पूर्व या समय पर) लोकसभा चुनावों का सामना करने के लिए खुद को तैयार कर रही है, जबकि विपक्ष अभी एकजुटता की रट से आगे नहीं बढ़ सका है। मई के आखिरी सप्ताह में मोदी सरकार के नौ साल पूरे होने के उपलक्ष्य में भाजपा ने मीडिया के साथ जो संवाद किया, उसमें भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सरकार के नौ साल के कामकाज पर सारा जोर दिया और महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने जो प्रस्तुतिकरण (पीपीटी) दिखाया उसमें विस्तार से मोदी सरकार के नौ सालों की उपलब्धियों की तुलना यूपीए सरकार के दस साल के कामकाज से करते हुए बताया गया कि कैसे मोदी सरकार ने नौ सालों में कितना बेहतर काम किया है। भाजपा ने अपने प्रचार के लिए जो नया नारा गढ़ा है वह है ‘सेवा सुशासन और गरीब कल्याण।’
अटल बिहारी वाजपेयी के जमाने के भाजपा के एक दिग्गज नेता के मुताबिक जबकि अभी चुनावों में करीब एक साल है और आम तौर पर चुनाव से दो-तीन महीने पहले पार्टी अपने पूरे कार्यकाल की उपलब्धियों का ब्यौरा देती है। लेकिन इस बार जिस तरह दस साल पूरे होने से पहले ही नौ सालों के कामकाज और उपलब्धियों को इस तरह पेश किया जा रहा है मानों इसी साल लोकसभा के चुनाव होने हैं, इससे साफ है कि सरकार और पार्टी के शीर्ष स्तर पर लोकसभा चुनावों को लेकर गंभीर मंथन हो रहा है।
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