Home Breaking News तालियों की गड़गड़ाहट से भावुक हुए महेश भट्ट, बोले, ‘मुसीबत में ही मिलता है खजाना’

तालियों की गड़गड़ाहट से भावुक हुए महेश भट्ट, बोले, ‘मुसीबत में ही मिलता है खजाना’

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तालियों की गड़गड़ाहट से भावुक हुए महेश भट्ट, बोले, ‘मुसीबत में ही मिलता है खजाना’

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फिल्म ‘राज’ के जरिए महेश भट्ट ने हिंदी सिनेमा में हॉरर फिल्मों की एक नई इबारत लिखी। महेश भट्ट से जब यह पूछा गया कि फिल्म ‘राज’ की शुरुआत के पीछे वजह क्या रही होगी? महेश भट्ट ने कहा, ‘जब हमने ‘राज’ की शुरुआत की तो, उस समय इंडस्ट्री में बड़े-बड़े स्टार्स को लेकर फिल्में बन रही थी। हम कुछ नया करने की कोशिश करते हैं तो लोग करने नहीं देते। मैंने सोचा कि नई स्टारकास्ट को लेकर ऐसी कौन सी फिल्म बनाई जा सकती है। फिर, ‘राज’ पर काम शुरू करने का ख्याल आया। जब हमने ‘राज’ बनाई थी तो उस समय डिनो मोरिया और बिपाशा बसु नए थे।’


फिल्म ‘राज’ से विक्रम भट्ट ने हॉरर का जो जॉनर पकड़ा वह बदस्तूर अब भी जारी है।  ‘राज’ की सफलता के बाद विक्रम भट्ट ने ‘राज -द मिस्ट्री कंटिन्यू’, ‘राज 3डी’, ‘राज रिबूट’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया जिसका निर्माण महेश भट्ट ने किया था। महेश भट्ट की इन फिल्मों के अलावा विक्रम भट्ट ने फिल्म ‘1920’, ‘शापित’, ‘हॉन्टेड 3डी’, ‘घोस्ट’, ‘क्रिएचर 3डी’ और ‘जुदा होके भी’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया। फिल्म ‘जुदा होके भी’ की कहानी महेश भट्ट ने लिखी थी।


अब अपने पिता विक्रम भट्ट के नक्शेकदम पर चलते हुए कृष्णा भट्ट भी हॉरर जॉनर से अपने निर्देशन करियर की शुरुआत कर रही हैं। महेश भट्ट कहते हैं, ‘कोविड ने हमें श्मशान घाट पर लाकर खड़ा कर दिया था। ऐसे में इस बच्ची  ने जाकर अपनी जादू की छड़ी निकाली और ‘1920: हॉरर्स ऑफ द हार्ट’ का निर्देशन किया। उस समय हमें तिनके का सहारा मिला और हमने उसे पकड़ लिया।’ 


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