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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा से जुड़ी पत्रिका ‘ऑर्गेनाइजर’ में छपा एक लेख इस समय खूब चर्चा में है। पत्रिका के संपादक प्रफुल्ल केतकर के द्वारा लिखे गए इस संपादकीय लेख में कहा गया है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव परिणाम ने यह बता दिया है कि केवल ‘हिंदुत्व का एजेंडा’ और ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि’ चुनाव जीतने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसमें किसी राज्य का चुनाव जीतने के लिए मजबूत स्थानीय नेतृत्व को अहम कारक बताया गया है। माना जा रहा है कि इस लेख के बहाने संघ ने भाजपा को राज्यों में मजबूत स्थानीय नेतृत्व विकसित करने और विकासवादी राजनीति अपनाने की सलाह दी है।
हिंदुत्व और ब्रांड मोदी को लेकर संघ परिवार की चिंता का कारण क्या है? क्या भाजपा की इस सबसे बड़ी ताकत में अब चुनाव जिताने की क्षमता बाकी नहीं बची? लोकसभा चुनाव के लगभग एक साल पहले जब भाजपा चुनावी तैयारियों को अंतिम जामा पहना रही हो, संघ की इस नसीहत के खास मायने हैं और इसे समझे जाने की आवश्यकता है।
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