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MP Politics: अब मामा नहीं ‘भैया’ बने शिवराज, कांग्रेस का भी आधी आबादी पर फोकस, समझिए इस मास्टर स्ट्रोक को

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MP Politics: अब मामा नहीं ‘भैया’ बने शिवराज, कांग्रेस का भी आधी आबादी पर फोकस, समझिए इस मास्टर स्ट्रोक को

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Ladli Bahna Yojana: Women voters in focus of Shivraj government, Congress also in competition

शिवराज सिंह चौहान ने सिंगल क्लिक के जरिये लाड़ली बहनों के खाते में पैसे ट्रांसफर किए।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विधानसभा चुनावों से महज पांच महीने पहले मास्टर स्ट्रोक खेलकर विरोधियों के हौंसले पस्त कर दिए हैं। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कमलनाथ और उनकी टीम ने शिवराज की लाड़ली बहना योजना के मुकाबले नारी सम्मान योजना को उतारा था। एक हजार रुपये के बदले 1,500 रुपया प्रतिमाह देने का वादा किया। इसका जवाब शिवराज सिंह चौहान ने जबलपुर में यह कहकर दिया किअभी एक हजार रुपया डाल रहे हैं। जैसे-जैसे पैसे आएंगे, धनराशि भी बढ़ाते जाएंगे। तीन हजार रुपये महीने तक पहुंचेंगे। फिर बोले कि मैं हर लाड़ली बहन को लखपति बनाना चाहता हूं। 

नवंबर-दिसंबर में मध्य प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसे देखते हुए लाड़ली बहना योजना को मास्टर स्ट्रोक समझा जा रहा है। ऐसा क्यों? इसे समझना है तो 2018 के चुनाव परिणाम देखने होंगे। उस वक्त भाजपा को 1.56 करोड़ वोट मिले थे और कांग्रेस को 1.55 करोड़ वोट। प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को 41.02% और कांग्रेस को 40.89% वोट। यानी ओवरऑल भाजपा और शिवराज का पलड़ा भारी ही था। फिर कुछ सीटों पर करीबी मुकाबलों ने कांग्रेस को भाजपा के आगे लाकर खड़ा कर दिया। इसका मतलब है कि वोट प्रतिशत अधिक होने के बाद भी महज कुछ सीटों के अंतर से भाजपा सरकार बनाने से वंचित रह गई थी। 2018 के चुनाव नतीजों में यह देखने में आया कि मध्य प्रदेश की 230 में से 51 विधानसभा सीटों पर महिलाओं ने वोटिंग में पुरुषों को पीछे छोड़ा था। इनमें करीब 80% सीटों पर भाजपा की जीत हुई थी। यानी महिलाओं की पहली पसंद शिवराज ही थे, कांग्रेस नहीं। इसी को आधार बनाकर भाजपा ने 2023 की रणनीति बनाई है। हितग्राहियों की राजनीति पर भरोसा किया जा रहा है। गुजरात में हितग्राहियों को पन्ना समितियों में रखकर भाजपा ने विधानसभा चुनावों में जबरदस्त जीत हासिल की थी और उसी को यहां दोहराने की तैयारी है।  

शिवराज भैया के तौर पर छवि गढ़ रहे

लाड़ली बहना योजना के जरिये मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का मेकओवर भी हुआ है। लाड़ली लक्ष्मी योजना के जरिये वह बच्चियों का मामा बने थे। अब भैया शिवराज के तौर पर छवि गढ़ रहे हैं क्योंकि भांजियां वोट नहीं डालती, बहनें जरूर डालती हैं। रणनीति को ऐसे समझिए कि 2023 का नया इलेक्टोरल रोल कहता है कि 2018 के मुकाबले महिला वोटरों का अनुपात बढ़ा है। 2018 में जहां एक हजार पुरुष वोटर्स पर 898 महिला वोटर थीं, 2023 में यह आंकड़ा बढ़कर 931 हो गया है। इस समय 2.79 करोड़ पुरुष वोटर हैं तो 2.60 करोड़ महिला वोटर हैं। इसमें भी 1.25 करोड़ महिला वोटर तो लाड़ली बहना योजना की हितग्राही बन चुकी हैं। अन्य 1.35 करोड़ महिलाओं में से 40 लाख से अधिक महिलाएं राज्य सरकार की किसी न किसी योजना का लाभ ले रही हैं। यह आंकड़ा शिवराज के पक्ष में काम करेगा।

कांग्रेस भी होड़ में

प्रदेश में महिला वोटरों का गणित कांग्रेस भी समझती है। उसने भी लाडली बहना योजना की घोषणा होते ही 1500 रुपये देने की बात रख दी। कांग्रेस ने कहा है कि मध्य प्रदेश में उसकी सरकार बनने पर ‘नारी सम्मान योजना’ शुरू होगी. इसकी पात्र महिला के खाते में 1500 रुपये हर महीने सरकार जमा करवाएगी। कमलनाथ ने उन महिलाओं पर भी फोकस किया है, जिन्हें शिवराज सरकार ने पात्रता के नाम पर पीछे रखा है। भाजपा ने अपनी योजना में 23 साल से 60 साल की उम्र की महिलाओं को योजना का लाभ देने का प्रावधान किया है, कांग्रेस अपनी योजना में 18 से लेकर 60 साल की उम्र की महिलाओं को योजना का लाभ देगी। साथ ही विवाहित और अविवाहित दोनों तरह की महिलाओं को योजना से जोड़ा जाएगा। इसके अलावा कांग्रेस ने गैस सिलेंडर भी 500 रुपये में देने का वादा कर दिया है। इसके अलावा कांग्रेस ने 100 यूनिट तक बिजली माफ, 200 यूनिट तक बिल हाफ की है। देखना है कि जनता इस बार क्या फैसला लेती है। 

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