Home Breaking News आज का शब्द: बोध और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘तुमसे अलग होकर लगता है’

आज का शब्द: बोध और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘तुमसे अलग होकर लगता है’

0
आज का शब्द: बोध और सर्वेश्वरदयाल सक्सेना की कविता ‘तुमसे अलग होकर लगता है’

[ad_1]

                
                                                                                 
                            
हिंदी हैं हम शब्द-श्रृंखला में आज का शब्द है - बोध जिसका अर्थ है 1. एहसास 2. ज्ञान; जानकारी 3. समझ। कवि सर्वेश्वरदयाल सक्सेना ने अपनी कविता में इस शब्द का प्रयोग किया है। 

तुमसे अलग होकर लगता है
अचानक मेरे पंख छोटे हो गए हैं,
और मैं नीचे एक सीमाहीन सागर में
गिरता जा रहा हूँ।
अब कहीं कोई यात्रा नहीं है,
न अर्थमय, न अर्थहीन;
गिरने और उठने के बीच कोई अंतर नहीं।

तुमसे अलग होकर
हर चीज़ में कुछ खोजने का बोध
हर चीज़ में कुछ पाने की
अभिलाषा जाती रही
सारा अस्तित्व रेल की पटरी-सा बिछा है
हर क्षण धड़धड़ाता हुआ निकल जाता है।

तुमसे अलग होकर
घास की पत्तियाँ तक इतनी बड़ी लगती हैं
कि मेरा सिर उनकी जड़ों से
टकरा जाता है,
नदियाँ सूत की डोरियाँ हैं
पैर उलझ जाते हैं,
आकाश उलट गया है
चाँद-तारे नहीं दिखाई देते,
मैं धरती पर नहीं, कहीं उसके भीतर
उसका सारा बोझ सिर पर लिए रेंगता हूँ।

तुमसे अलग होकर लगता है
सिवा आकारों के कहीं कुछ नहीं है,
हर चीज़ टकराती है
और बिना चोट किये चली जाती है।

तुमसे अलग होकर लगता है
मैं इतनी तेज़ी से घूम रहा हूँ
कि हर चीज़ का आकार
और रंग खो गया है,
हर चीज़ के लिए
मैं भी अपना आकार और रंग खो चुका हूँ,
धब्बों के एक दायरे में
एक धब्बे-सा हूँ,
निरंतर हूँ
और रहूँगा
प्रतीक्षा के लिए
मृत्यु भी नहीं है।

6 minutes ago

[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here