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Cyclone Biparjoy
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
चक्रवातीय तूफान ‘बिपरजॉय’ का असर दिखने लगा है। अभी तक जितने भी इनपुट आ रहे हैं, उसके मुताबिक ‘बिपरजॉय’ से भारी तबाही साफ नजर आ रही है। गुजरात, राजस्थान, महाराष्ट्र और केरल सहित 9 राज्यों के लिए अगले 48 घंटे बहुत अहम हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के पूर्व सदस्य मेजर जनरल (रि.) डॉ जेके बंसल बताते हैं, ‘बिपरजॉय’ कई सारे चैलेंज दे जाएगा। चक्रवातीय तूफान के बाद सबसे बड़ी चुनौती, पीड़ित लोगों को महामारी से बचाना है। जिन इलाकों से यह तूफान गुजरेगा, वहां पर कुछ समय के लिए सब कुछ तहस नहस दिखाई पड़ेगा। हालांकि केंद्र एवं राज्य सरकारों ने जिस त्वरित गति से ‘राहत एवं बचाव’ कार्य शुरू करने के लिए तमाम संसाधन एकत्रित किए हैं, उन्हें देखकर कहा जा सकता है कि ‘बिपरजॉय’ से मानव हानि की संभावना न के बराबर रहेगी। चक्रवाती महा-तूफान का मिजाज ‘रास्ते और स्पीड’ पर निर्भर करेगा। अगर इसमें कुछ बदलाव हुआ तो नुकसान भी थोड़ा कम हो सकता है।
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कम कर सकते हैं जान-माल की हानि
बुधवार सुबह अमर उजाला डॉट कॉम के साथ बातचीत में डॉ. जेके बंसल ने कहा, ‘बिपरजॉय’ एक भयंकर चक्रवाती तूफान है। हिन्दुस्तान का पश्चिमी हिस्सा इसकी चपेट में आ सकता है। इस तूफान की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रतिघंटा बताई जा रही है। समुद्र में 15-20 फुट ऊंची लहरें उठ सकती हैं। हालांकि तूफान का ज्यादा प्रभाव गुजरात पर पड़ेगा, लेकिन इसके मिजाज को लेकर कुछ सटीक नहीं कहा जा सकता। इस तरह की आपदा को रोकना बहुत मुश्किल है, मगर इससे होने वाली जान-माल की हानि को काफी हद तक कम किया जा सकता है। असली चैलेंज तो चक्रवाती तूफान के जाने के बाद सामने आएगा। अभी हजारों लोगों को कैंपों में शिफ्ट किया गया है। तूफान का सबसे ज्यादा असर सड़कों और बिजली के खंबों पर पड़ता है। पानी का ठहराव और सड़कें टूटने के कारण स्वास्थ्य एवं दूसरी सेवाएं प्रभावित होती हैं। पशु बह जाते हैं। तमिलनाडु के तटवर्ती क्षेत्रों में 2004 की भीषण सुनामी लहरों में अनेक पशु कई दिन बाद भी फंसे हुए थे।
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