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गुजरात हाईकोर्ट (फाइल फोटो)।
– फोटो : सोशल मीडिया
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गुजरात उच्च न्यायालय ने नाबालिग दुष्कर्म पीड़िता की गर्भपात की अनुमति मांगने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए गुरुवार को अधिकारियों से आरोपी को पेश करने को कहा ताकि उसके और लड़की के बीच “समझौते” की संभावना तलाशी जा सके। इससे पहले कोर्ट ने दुष्कर्म पीड़िता की मेडिकल जांच का आदेश दिया था।
पीड़िता के वकील द्वारा पेश किए गए रिकॉर्ड और डॉक्टरों के एक पैनल द्वारा प्रस्तुत मेडिकल रिपोर्ट को देखने के बाद न्यायमूर्ति समीर दवे ने गुरुवार को अधिकारियों को 23 वर्षीय आरोपी को पेश करने का निर्देश दिया, जो शुक्रवार शाम न्यायिक हिरासत में भेजे जाने के बाद मोरबी जेल में बंद है। न्यायाधीश ने आदेश पारित करने से पहले पीड़िता के वकील सिकंदर सैय्यद से पूछा कि “आरोपी कहां है? समझौते का कोई मौका है?” वकील ने पहले तर्क दिया था कि अगर लड़की को बच्चे को जन्म देने के लिए मजबूर किया गया तो वह अपनी जीवन लीला समाप्त कर सकती है।
वकील सैय्यद ने अदालत को बताया कि उन्होंने समझौते की संभावना तलाशने की पूरी कोशिश की थी, लेकिन आरोपी तैयार नहीं था। इस पर न्यायमूर्ति दवे ने कहा, “ठीक है, मैं उसे फोन करूंगा। अगर वह सलाखों के पीछे है, तो मैं उसे फोन कर सकता हूं। मुझे उससे पूछने दीजिए… मुझे लड़के से पता लगाने दीजिए… मैंने कुछ समाधान सोचा है। लेकिन मैं उसका खुलासा नहीं कर रहा हूं। कल विचार करूंगा।”
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