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‘कश्मीर फाइल्स’ पर बयान
निर्देशक विवेक अग्निहोत्री की फिल्म ‘कश्मीर फाइल्स’ को लेकर मनोज मुंतशिर ने कहा था कि विवेक को फिल्म बनाने का खामियाजा भुगतना पड़ेगा। दरअसल, इस फिल्म को लेकर जब विवाद शुरू हुआ तो मनोज मुंतशिर ने भी अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि कश्मीर में डेढ़ लाख कश्मीरी हिंदू विस्थापित कर दिए गए और दिल्ली की सरकारें सोती रहीं। 1984 के सिख दंगे सबको याद थे, लेकिन 1990 की कश्मीर की इस त्रासदी पर किसी का ध्यान नहीं गया।
राहुल गांधी के चीन वाले बयान पर निशाना
राहुल गांधी के चीन पर दिए गए बयान की निंदा करते हुए मनोज मुंतशिर ने भोपाल में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान चाणक्य का हवाला देते हुए कहा, ‘विदेशी माता से पैदा हुआ पुत्र राष्ट्रभक्त हो ही नहीं सकता, प्रॉब्लम डीएनए का है। पूरी दुनिया में भारत ही ऐसा है जहां वतनपरस्ती, देश प्रेम, देश भक्ति सिखानी नहीं पड़ती, हम सीने में लेकर पैदा होते हैं। लेकिन बहुत दुख होता है जब एक गैर जिम्मेदार नेता यह कहता है कि हमारे सैनिक चीनी सैनिकों से पिट रहे हैं। इतनी शर्मनाक भाषा का प्रयोग कोई कैसे कर सकता है।’
पीएम मोदी पर दिए बयान पर कही ये बात
राहुल गांधी के अमेरिका में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिए बयान पर मनोज मुंतशिर ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जिन लोगों ने देश को 200 साल गुलाम बनाकर रखा, उनसे कह रहे है लोकतंत्र खतरे में है। बिल्ली दूध की रखवाली करे ऐसा कभी होता है क्या? संसद उद्घाटन का बहिष्कार करने वालों को लेकर भी मनोज मुंतशिर ने कहा था कि पीएम मोदी ने वास्तु शास्त्र का ध्यान रखकर संसद का निर्माण करवाया, पहले ही दिन आसुरी शक्तियां बाहर हो गई। संसद में बैठने का अधिकार उनको होना चाहिए, जो देश के प्रति सम्मान रखते हैं। ऐसे लोगों का अधिकार होना ही नहीं चाहिए जो विदेश में जाकर हमारे देश की बुराई करते हैं।
सावरकर वाली टिप्पणी पर साधा निशाना
लोकसभा की सदस्यता रद्द होने के बाद राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब सरकार पर हमला बोला तो उस दौरान पत्रकारों ने माफी मांगने पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा था कि मेरा नाम राहुल गांधी है, सावरकर नहीं। राहुल गांधी के इस बयान पर मनोज मुंतशिर ने कहा कि जब तक अनावश्यक रूप से सावरकर का नाम नहीं लिया गया, मैं इस विषय पर चुप रहा, लेकिन अब कहना पड़ेगा कि युवराज एक बार देश प्रेम के लिए काला पानी जाओ। कोल्हू में बैल की तरह जुतो, दो कटोरे पानी में पूरा दिन गुजारो, जेल की दीवारों पर मां भारती की स्तुति में छह हजार कविताएं लिखो, फिर सावरकर पर टिप्पणी करना।
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