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भारत-अमेरिका संबंध: नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को उत्सव में कहा कि भारत और अमेरिका के बीच गठजोड़ पर प्रतिबंध है। विश्व के दो सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में दोनों देश वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान दे सकते हैं।
‘सबसे अहम साझेदारी में से एक’
अमेरिकी राष्ट्रपति जो कि जॉइंट प्रेसिडेंट के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका के अधिग्रहण और वैश्चिक रणनीतिक गठजोड़ में एक नया अध्याय शामिल है। वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जोगेस्ट्रोल ने कहा था कि भारत के साथ यह विश्व की सबसे अहम साझेदारी में से एक है जो इतिहास में किसी भी समय अधिक मजबूत, मजबूत और अधिक शक्तिशाली है।
प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज का दिन भारत और अमेरिका के इतिहास में एक खास खंडहर है। आज की हमारी चर्चा और महत्वपूर्ण विशिष्टता से हमारी समग्र वैश्चिक रणनीतिक गठजोड़ में एक नया अध्याय है। हमारे प्रस्ताव का सबसे अहम स्तंभ लोगों के बीच संपर्क है। भारतीय मूल के लोगों ने अमेरिका के विकास में 40 लाख से अधिक का योगदान दिया है। मेरा विश्वास है कि इन सिक्कों के आधार पर हम दुनिया की खोजों को पूरा कर सकते हैं।’
अंतरिक्ष सहयोग में स्केल कदम
भारत के आर्टेमिस संधि में शामिल होने की घोषणा के बारे में मोदी ने कहा कि हमने अंतरिक्ष सहयोग में नया कदम आगे बढ़ाया है। हमारे राष्ट्रपति आश्रम के साथ कई क्षेत्रीय एवं वैश्विक आश्रमों पर चर्चा हुई। उन्होंने कहा, भारत- अमेरिका के लिए व्यापार और निवेश साझेदारी, दोनों देशों के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है और आज अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा साझेदार है।
उन्होंने कहा, ‘हम दोनों इस बात पर सहमत हैं कि हमारी स्ट्रैटजिक टेक्नोलॉजी गठजोड़ को मुनासिब में करने के लिए एडवेंचर्स, बिजनेस और लर्निंग का साथ आना बहुत अहम है।’ भारत और अमेरिका के बीच घनिष्ठ रक्षा सहयोग हमारे आपसी विश्वास और साझा रणनीति साज़िश का प्रतीक है।
मोदी ने कहा कि पुराने समय के क्रेता-विक्रेता संबंधों को पीछे छोड़ दिया गया है, आज हम प्रौद्योगिकी के संयोजन-विकास, सह-विकास और सह-निर्माण की दिशा में बढ़ रहे हैं।
‘ये हैं असली ताकतों की गारंटी’
अमेरिका के साथ भारत की मजबूत पकड़ पर मोदी ने कहा कि व्हाइट हाउस में इतनी बड़ी संख्या में भारतीय लोग शामिल हैं, यह बात इस बात का सबूत है कि भारतीय अमेरिकी हमारी मजबूत ताकत हैं।
मोदी ने कहा, ‘इन आरोपों को और गहरा करने के लिए हम अमेरिका के कॉलेज और फाइनैंशियल इंटेलिजेंस में कंसल्टेंसी एसोसिएशन के फैसले का स्वागत करते हैं।’ उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका में कंधे से कंधा मिलाकर कट्टरवाद के खिलाफ लड़ाई चल रही है। हमारा मानना है कि सीमा पार के शरणार्थियों को समाप्त करने के लिए ठोस कार्रवाई जरूरी है।’
उन्होंने आगे कहा, ‘हिंद प्रशांत क्षेत्र में शांति और सुरक्षा हमारी साझा जिम्मेदारी है।’ हम एकमत हैं कि इस क्षेत्र का विकास और सफलता पूरे विश्व के लिए महत्वपूर्ण है।’ उन्होंने कहा कि अमेरिका-भारत में व्यापार और निवेश सिर्फ दोनों देशों के लिए जरूरी नहीं है, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है।
एक सवाल के जवाब में मोदी ने कहा कि लोग ऐसा नहीं कहते, बल्कि भारत एक लोकतंत्र है और जैसा कि राष्ट्रपति ने कहा था, भारत और अमेरिका दोनों के डीएनए में लोकतंत्र है।
‘हमारे रागो में है लोकतंत्र’
मोदी ने कहा, ‘लोकतंत्र हमारे रागों में है। लोकतंत्र को हम जीते हैं. हमारे विद्वानों ने संविधान के रूप में शब्दों को ढीला किया है। जब हम लोकतंत्र को जिताएंगे तब भेदभाव की बात ही नहीं आएगी। हमारी सरकार सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास के सिद्धांत पर चलती है। ‘भारत के लोकतांत्रिक लोकतंत्र में कोई भेदभाव नहीं है।’
उन्होंने कहा कि सरकार सभी के लिए है और इसमें जाति, पंथ, धर्म आदि को लेकर किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होता है। मोदी ने कहा कि कोविड महामारी और यूक्रेन संकट से वैश्विक दक्षिण देश विशेष रूप से प्रभावित हैं।
वहीं, जलवायु परिवर्तन के सवाल पर उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि यह मानव जाति के लिए खतरा है, जबकि प्रधानमंत्री ने कहा कि हम भारत में ग्रीन एनर्जी सेंटर बनाने के लिए काम कर रहे हैं।
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