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इमरजेंसी की कहानी: ‘न खाता न बही-जो छोटे गांधी कहें वही सही’, जब प्रधानमंत्री आवास में कैद रहा भारतीय लोकतंत्र

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इमरजेंसी की कहानी: ‘न खाता न बही-जो छोटे गांधी कहें वही सही’, जब प्रधानमंत्री आवास में कैद रहा भारतीय लोकतंत्र

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Former JNU Professor Dr Anand Kumar talks to Amar Ujala on Emergency

इमरजेंसी की कहानी।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


‘पहले तो नेताओं को बंद किया, दलों पर प्रतिबंध लगाया, मीडिया को काबू में किया, न्यायपालिका को झुकाया, नौकरशाही को सच में नौकर बनाया, आम लोग, खासतौर से गरीबों के घरों को उजाड़ने लगे और नसबंदी होने लगी। आपातकाल में ये सब तो हुआ ही, साथ ही इसके खिलाफ कोई संवैधानिक समाधान भी नहीं था, क्योंकि संसद में बहुमत की मंजूरी से ये हुआ था। संविधान के सबसे बड़े रक्षक, राष्ट्रपति की स्वीकृति से हुआ। कैबिनेट की तरफ से किसी ने इस पर एतराज नहीं किया। देखने में तो लगता था कि सब विधान सम्मत हो रहा है, लेकिन लोकतांत्रिक विधान का लोकतंत्र के खिलाफ इस्तेमाल एक अद्वितीय उदाहरण था। न खाता न बही, जो ‘छोटे गांधी’ कहें, वही सही। लगभग 21 महीने तक भारतीय लोकतंत्र, प्रधानमंत्री आवास में कैद रहा।’ 

गांधीवादी विचारक, प्रख्यात समाजवादी एवं जेएनयू के पूर्व प्रोफेसर और राजनीतिक विश्लेषक डॉ आनंद कुमार ने अमर उजाला के साथ आपातकाल की यादें साझा कीं। प्रो आनंद कुमार यहीं नहीं रुके, उन्होंने इमरजेंसी की कहानी के साथ ही मौजूदा परिस्थितियों को लेकर भी तीखी टिप्पणी कर दी। वे बोले आज भी हालात अच्छे नहीं है, संकेत बहुत खराब हैं, मगर 1975 की तुलना में अभी भारत आपातकाल के दौर से नहीं गुजर रहा है, कल क्या होगा, कहना मुश्किल है।

सबसे लोकप्रिय प्रधानमंत्री, जब बन गई तानाशाह … 

प्रो. आनंद कुमार के मुताबिक, भारत के समाज और देश की लोकतंत्र यात्रा में जहां संविधान का बनना और उसका लागू होना यानी 26 जनवरी 1950 एक रोमांचक स्वर्णिम अध्याय है। वहीं 25 जून 1975 से आपातकाल का लगना और लगभग 21 महीनों तक देश के सभी गैर सरकारी दलों के राष्ट्रीय नेताओं का जेलों में बंद होना, उस समय के सामाजिक कार्यकर्ताओं को बिना मुकदमा, बिना चार्जशीट, बिना किसी अपराध सूची के जेल में बंद रखना और पत्रकारों पर निगरानी व मीडिया पर नियंत्रण, चारों तरफ पुलिस और सरकारी पार्टी के गुंडो का बोलबाला, एक काला अध्याय है। जयप्रकाश नारायण, राज नारायण, मोरारजी देसाई, अटल बिहारी वाजपेयी, चंद्रशेखर, लालकृष्ण आडवाणी, लालू प्रसाद यादव, नीतिश कुमार, अरुण जेटली, वेंकैया नायडू, शरद यादव, जार्ज फर्नांडिस, वीपी सिंह, मुलायम सिंह यादव और रामकृष्ण हेगड़े सहित अनेक नेताओं को जेल में बंद किया गया। आपातकाल के दौरान देश की सत्ता व्यवस्था का संवैधानिक ढांचा पूरी तरह से ध्वस्त कर दिया गया। इंदिरा गांधी, जो अपने समय की सबसे लोकप्रिय नेता थीं, प्रधानमंत्री भी थीं, वे धीरे-धीरे एक तानाशाह के रूप में बदल गईं। एक समय ऐसा भी आया, जब देश में चारों तरफ त्राहि त्राहि का माहौल हो गया। 





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