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डॉक्टर कहते हैं, आंखों की कई अलग-अलग स्थितियां और बीमारियां हैं जो बच्चे की दृष्टि को प्रभावित कर सकती हैं। डॉक्टर कहते हैं, मौजूदा समय में बच्चों में इन समस्याओं के लिए पोषण में कमी और स्क्रीन टाइम का बढ़ना दो प्रमुख कारण हो सकते हैं।
आंखें चूंकि आपकी क्वालिटी ऑफ लाइफ से संबंधित हैं, इसलिए जरूरी है कि सभी उम्र के लोगों को इनका विशेष ध्यान रखना चाहिए।
लंबे समय तक मोबाइल-लैपटॉप जैसी स्क्रीन पर बच्चों का अधिक समय बिताना आंखों के लिए बहुत हानिकारक हो सकता है। बच्चों को डिजिटल उपकरणों के अधिक संपर्क से बचाना आवश्यक है। शिशुओं को स्क्रीन से बिल्कुल दूर रखना चाहिए। ऐसे मामलों में जहां बच्चों को ऑनलाइन सीखना पड़ता है, सुनिश्चित करें कि वे अपनी आंखों की अतिरिक्त देखभाल करें और स्क्रीन पर उतना ही समय बिताएं जितना कि आवश्यक हो।
इसके अलावा आहार में पौष्टिकता की कमी आंखों की समस्याओं के लिए प्रमुख कारण रही हैं। आइए जानते हैं कि भोजन में किन चीजों को शामिल करना आंखों की सेहत को बेहतर बनाए रखने के लिए आवश्यक है?
नट्स यानी सूखे मेवे न सिर्फ आंखों के लिए बल्कि संपूर्ण शरीर को स्वस्थ रखने के लिए फायदेमंद माने जाते हैं। नट्स और सीड्स से वयस्कों के लिए प्रतिदिन विटामिन-ई की मात्रा को प्राप्त किया जा सकता है। अध्ययन में पाया गया कि विटामिन ई, अन्य पोषक तत्वों के साथ, एज रिलेटेड मैक्यूलर डीजेनरेशन (एएमडी) को रोकने में मदद कर सकता है। बच्चों की आंखों को भी सुरक्षा देने में इसके लाभ हैं। हेज़लनट्स, मूंगफली और बादाम-अखरोट विटामिन ई के अच्छे स्रोत हैं।
केल, पालक और कोलार्ड साग, विटामिन-सी और ई दोनों से भरपूर होते हैं। इनमें कैरोटीनॉयड ल्यूटिन और ज़ेक्सैन्थिन भी होते हैं, जो आंखों को स्वस्थ रखने में काफी लाभकारी हो सकते हैं। विटामिन-ए को बच्चों में धुंधला या कम दिखने की समस्या से लेकर वयस्कों में एएमडी और मोतियाबिंद जैसे दीर्घकालिक नेत्र रोगों के जोखिम को कम करने वाला पाया गया है। हरे रंग के पत्तेदार साग आयरन और अन्य पोषक तत्वों के लिए भी लाभकारी हैं।
अंडे सिर्फ प्रोटीन ही नहीं प्रदान करते बल्कि इनमें मौजूद जिंक आपके शरीर को ल्यूटिन और ज़ेक्सैन्थिन का उपयोग करने में मदद करता है। ये यौगिक आंखों को स्क्रीन से निकलने वाली हानिकारक नीली रोशनी से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करती है। बच्चों के संपूर्ण विकास के लिए आहार में अंडों को जरूर शामिल किया जाना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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