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Manipur Violence
– फोटो : Social Media
विस्तार
मेरा घर इंफाल घाटी में है। बचपन से लेकर जवानी तक यहीं बीती है। मैं जिस इलाके में रहता हूं, वहीं कुकी और नगा भी रहते हैं। हमारी उम्र के मैतेई, कुकी और नगा बच्चे बचपन से साथ-साथ खेलकर पले और बढ़े, लेकिन वक्त के बदले हालातों ने न सिर्फ इन पड़ोसियों से रिश्ते खत्म कर दिए, बल्कि दुश्मनी जैसे हालात हो गए। कभी जिन पड़ोसियों के भरोसे हम लोग अपना घर छोड़कर नातेदारों के यहां चले जाते थे। वही लोग अब मौका देखकर हमारे घरों को आग के हवाले कर रहे हैं। हमारे पड़ोसियों ने ही हमारे घर जला दिए। मेरे माता-पिता, भाई-बहन समेत हम सभी लोग अब अपने एक रिश्तेदार के गांव में रह रहे हैं। मणिपुर की इंफाल घाटी में रहने वाले हाओरोकचम ने अमर उजाला डॉट कॉम को मणिपुर से फोन पर अपना दर्द बयां किया। मणिपुर में ऐसे बहुत से लोगों से बातचीत हुई तो सबने यही बताया कि यहां पर हालात इतने खराब है कि हालात से निपटने में हो रही देरी के पर एक एक मिनट भारी पड़ रहा है।
हमारे पड़ोसियों ने घर को आग लगा दी
मैतेई समुदाय के हाओरोकचम ने बताया कि 27 अप्रैल को वह इंफाल से वापस अपने गांव गए थे, क्योंकि बिगड़े हालातों के चलते तब से लेकर अब तक इंटरनेट की सेवाएं बदहाल हैं और घरवालों का हाल-चाल नहीं मिल रहा था। हाओरोकचम के मुताबिक, हालात बीते कुछ समय से बिगड़ तो रहे थे, लेकिन इस तरह से आग लगाने वाले हालात होंगे, ऐसा उन्होंने सपने में भी नहीं सोचा था।
उनका कहना है कि 3 मई से जब हालात ज्यादा बिगड़ने लगे तो उनको अपने आसपास रहने वाले कुकी और नगा परिवारों पर भरोसा इसलिए होने लगा क्योंकि बचपन से वह इन लोगों के साथ पले बढ़े और साथ खेले कूदे थे। वह कहते हैं कि उनको पूरा भरोसा था कि बिगड़े हालातों में उनके पड़ोसी ही उनकी मदद करेंगे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भरभराती हुई आवाज में वह कहते हैं कि मेरे इन्हीं अपने पड़ोसियों ने बिगड़ते हुए हालात में मेरे घर को आग के हवाले कर दिया।
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