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अभिनेता अनिल कपूर ने बताया, ‘कुछ किरदार ऐसे होते हैं जो जो मेरे निजी जीवन के बिल्कुल ही विपरीत होते है जैसा कि ‘द नाइट मैनेजर’ का किरदार है। ऐसे किरदार के लिए थोड़ी सी अलग से मेहनत करनी पड़ती है। लेकिन ऐसा भी नहीं है कि जो किरदार मेरे व्यक्तित्व से मिलते जुलते हैं उसके लिए मेहनत नहीं करनी पड़ी। जब भी मुझे कोई स्क्रिप्ट मिलती है, तो उसे कम से कम तीन सौ बार पढ़ता और अपने डायलॉग रिकार्ड करके निर्देशक के पास सुझाव लेने के लिए भेजता हूं। मुझे याद है जब मैंने ‘वो सात दिन’ फिल्म की थी तो उस फिल्म को देखने के बाद राज कपूर से कहा था कि बहुत अच्छी फिल्म है, ऐसी ही फिल्म किया करो।’
चाहे फिल्म हो, सीरीज या फिर टेलीविजन अनिल कपूर कहते हैं, ‘एक एक्टर को हमेशा काम करते रहना चाहिए। शूटिंग के दौरान तो हम लोग आपस में मिल पाते हैं, लेकिन एक बार जब शूटिंग खत्म होती है तो नहीं मिल पाते। ठीक उसी तरह से जब मैं मुंबई से दिल्ली और दिल्ली से मुंबई ट्रेन से आता था, तो ट्रेन में बहुत सारे लोग मिलते है। कई लोग से अच्छी से जान पहचान हो जाती है और जब ट्रेन से दादर स्टेशन पर उतरते थे, तो यह कहते है कि फिर मिलेंगे, लेकिन फिर कभी नहीं मिलते और उनके साथ बिताए क्षण ही याद रह जाते हैं। इसी तरह से शूटिंग के दौरान बिताए पल हमेशा याद रहते हैं, किसी से कभी -कभार मुलाकात हो जाती है, तो किसी से कभी नहीं होती है।’
अभिनेता अनिल कपूर ने इस अवसर पर दोस्ती को भी लेकर बात की। उन्होंने कहा, ‘दोस्ती का यह मतलब नहीं है कि उनसे रोज मुलाकात और बातचीत होती रहे, इंडस्ट्री में मेरी सभी से दोस्ती है। जब हम किसी कार्यक्रम में मिलते हैं, तो ऐसा जाहिर करते है कि जैसे कितने दिनों से बिछड़े दोस्त मिले हो। यह बहुत अच्छी बात है। मेरे मन में कभी किसी के लिए भी ईर्ष्या नहीं रही। अगर कभी किसी से मनमुटाव भी हुआ तो रात गई बात गई सोचकर भूल जाता हूं। किसी के कहे ऐसी कोई बात को दिल पर नहीं लेता हूं।’
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