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भारत दुनिया में फलों का सबसे बड़ा उत्पादक और सब्जियों का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक है। इसके बावजूद फलों और सब्जियों की प्रति व्यक्ति उपलब्धता काफी कम है क्योंकि फसल कटाई के बाद नुकसान होता है जो उत्पादन का लगभग 25% से 30% होता है।
इसके अलावा, बड़ी मात्रा में उत्पाद की गुणवत्ता भी उपभोक्ता तक पहुंचते-पहुंचते खराब हो जाती है। फलों और सब्जियों के विपणन से संबंधित अधिकांश समस्याओं का पता उनके जल्दी खराब होने से लगाया जा सकता है। अधिक विपणन लागत, बाजार की प्रचुरता, कीमत में उतार-चढ़ाव और इसी तरह की अन्य समस्याएं फलों और सब्जियों के खराब होने की वजहें हैं। कम तापमान पर, नष्ट होने की क्षमता काफी कम हो जाती है और इस प्रकार कोल्ड स्टोरेज या प्रशीतन का महत्व बढ़ जाता है।
भारत में कोल्ड स्टोरेज की स्थिति और इसकी क्षमता
देश में फलों और सब्जियों का अनुमानित वार्षिक उत्पादन लगभग 130 करोड़ टन है। यह देश के कृषि उत्पादन का 18 फीसदी है। देश में उत्पादन धीरे-धीरे बढ़ रहा है लेकिन कोल्ड स्टोरेज और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी क्षमता के दोहन में बड़ी बाधा बन रही है। अब उपलब्ध कोल्ड स्टोरेज सुविधाएं ज्यादातर एक ही वस्तु जैसे आलू, संतरा, सेब, अंगूर, अनार, फूल आदि के लिए हैं, जिसके चलते क्षमता का उपयोग कम होता है। टमाटर जैसी सब्जियों के भंडारण की समस्या भी इसके दामों को बढ़ाने में एक बड़ी वजह होती है।
इस मामले में जब हमनें कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा से बात की तो उन्होंने कहा, ‘हर साल एक पैटर्न सा बन गया है। इस समय एक सीजन खत्म होता और दूसरा शुरू होता है। कई इलाकों में टमाटर की बुवाई शुरू हो जाती है। देश में आपूर्ति की कमी हो जाती है जिसकी वजह से ये कीमतें बढ़ती हैं। यह आम प्रक्रिया है लेकिन इस बार ज्यादा ही हो गई।’
आगे उन्होंने कहा, ‘देश में असली सुधार व्यापर के क्षेत्र में होना चाहिए। अभी जो दाम कई जगह 100 रुपए से ऊपर चले गए हैं लेकिन किसानों से खरीद 30-40 रुपए में ही हो रही है। इसमें ज्यादा कमाई ट्रेड से जुड़े लोगों को होता है न कि किसानों को। बाजार मूल्य 50-60 रुपए से ज्यादा नहीं होना चाहिए। बाकी ट्रेड का कमीशन है। रिटेल ट्रेड का बहुत बड़ा माफिया होता है। इस पर कोई ध्यान ही नहीं दे रहा है। व्यापारी आपका शोषण कर रहा है।’
भंडारण के सवाल पर उन्होंने कहा, ‘टमाटर पर भंडारण को भले दोष दें लेकिन इसे आप कितने दिन तक रख सकते हैं। आलू और प्याज में तो भंडारण की कोई समस्या नहीं है। भंडारण का मुद्दा व्यापार के लोगों द्वारा बनाया जाता है।’
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