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खबरों के खिलाड़ी की नई कड़ी में एक बार फिर आपका स्वागत है। बीते हफ्ते की प्रमुख खबरों के विश्लेषण के साथ हम आपके सामने प्रस्तुत हैं। इस चुनावी चर्चा को अमर उजाला के
पर शनिवार रात नौ बजे और रविवार सुबह नौ बजे लाइव देखा जा सकता है।
यह चुनावी चर्चा विशेष है क्योंकि आज हम समान नागरिक संहिता पर बात करेंगे। आजादी के इतने सालों बाद भी इस पर एकराय क्यों नहीं बन पाई है। लोकसभा चुनाव से 10 महीने पहले यूसीसी (यूनिफॉर्म सिविल कोड) का मुद्दा उठाया जा रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि क्या चुनावी फायदे के लिए इस पर चर्चा हो रही है या सरकार वाकई इसे लेकर गंभीर है….। इसी अहम मुद्दे पर चर्चा के लिए इस बार हमारे साथ वरिष्ठ राजनीतिक विश्लेषक विनोद अग्निहोत्री, सुमित अवस्थी, अवधेश कुमार, डॉ. शम्स उल हसन, अंबर जैदी और विकास गुप्ता मौजूद रहे।
सुमित अवस्थी
‘देश में समान नागरिक संहिता या यूसीसी बहुत विवादित विषय है। भाजपा देश में यूसीसी लागू करना चाहती है लेकिन वाजपेयी सरकार में इस मुद्दे को टाल दिया गया था क्योंकि तब कई सहयोगी पार्टियां इसके खिलाफ थीं। आज भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ सत्ता में है, ऐसे में इन हालात में क्या सरकार यूसीसी के मुद्दे पर आगे बढ़ेगी या सिर्फ ये चुनावी शिगूफा बनकर तो नहीं रह जाएगा, इस पर सभी की नजरें हैं। यूसीसी की चर्चा के बीच कई अहम सवाल उठ रहे हैं, जिनमें पूछा जा रहा है कि देश में इसे लागू करना क्यों जरूरी है? क्या देश को इसकी जरूरत है और अगर आजादी के 75 साल बाद भी यह लागू नहीं हो पाया है तो कब लागू होगा?’
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