Home Breaking News अरशद वारसी ने कही मन की बात, बोले, आज भी मेरी सबसे ज्यादा दिलचस्पी निर्देशन में ही है

अरशद वारसी ने कही मन की बात, बोले, आज भी मेरी सबसे ज्यादा दिलचस्पी निर्देशन में ही है

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अरशद वारसी ने कही मन की बात, बोले, आज भी मेरी सबसे ज्यादा दिलचस्पी निर्देशन में ही है

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अभिनेता अरशद वारसी हिंदी सिनेमा के ऐसे कलाकार हैं जिन्होंने कई विविधतापूर्ण किरदार करके अपना नाम बनाया है। हालांकि, सबसे ज्यादा शोहरत उन्हें ‘मुन्नाभाई’ सीरीज की फिल्मों में सर्किट के किरदार ने दिलाई। न्यू मिलेनियल्स में कम लोगों को ही पता होगा कि अरशद वारसी को बड़े परदे पर अमिताभ बच्चन की कंपनी एबीसीएल ने लॉन्च किया था और यह भी कि अरशद वारसी को अब तक एक ही बार अमिताभ बच्चन के साथ कैमरे के सामने आने का मौका मिला, और वह फिल्म भी कभी रिलीज नहीं हो पाई। इन दिनों वेब सीरीज ‘असुर 2’ को लेकर सुर्खियों में बने अरशद से ‘अमर उजाला’ की एक खास बातचीत।



आपकी पहली फिल्म ‘तेरे मेरे सपने’ से लेकर अब तक की अभिनय यात्रा के बारे में आप कितने संतुष्ट हैं?

बहुत बढ़िया यात्रा रही है। उतार -चढ़ाव तो आते ही रहते हैं। मेरा मानना है कि अगर जिंदगी में उतार-चढ़ाव न हो तो जिंदगी बड़ी नीरस और बेरंग हो जाती है। बच्चों को मैं हमेशा समझाता रहता हूं कि तुम्हें सब बैठे बिठाए मिल गया लेकिन जिंदगी जीने का असली आनंद संघर्ष से मिली सफलता में ही है। मुझे लगता है कि मैं एक ही ऐसा अभिनेता हूं जिसने चार साल तक काम नहीं किया और फिर भी वापसी करने में सफल रहा।


‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ आपकी अभिनय यात्रा का अहम मोड़ साबित हुई, ये फिल्म कैसे मिली?

‘तेरे मेरे सपने’ के निर्देशक जॉय ऑगस्टीन मूलत: फिल्म संपादक रहे हैं। उनकी और राज कुमार हिरानी की अच्छी दोस्ती है। ‘तेरे मेरे सपने’ की एडिटिंग के दौरान राज कुमार हिरानी वहां आया करते थे। राजकुमार हिरानी उन दिनों मेरी खूब तारीफ किया करते थे। जब उन्होंने  ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ शुरू की तो उनका बुलावा आया और मैंने भी ये सोचकर ये फिल्म की थी कि शायद इस प्रस्ताव में भी कुछ अच्छा छुपा हो। और वही हुआ। बहुत ही अच्छा हो गया।


‘मुन्ना भाई एमबीबीएस’ और ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ के बाद ‘मुन्ना भाई एमबीबीएस 3’ की चर्चाएं तो खूब होती हैं, लेकिन इस पर ठोस कुछ भी पता नहीं चलता?

मैं हमेशा यही कहता रहा हूं कि इस फिल्म के लिए निर्माता तैयार हैं, कलाकार तैयार हैं, निर्देशक भी तैयार हैं। मतलब समस्या कुछ और है। जहां तक मेरा विचार है राजकुमार हिरानी इसकी पटकथा पर अटके हुए हैं। जिस दिन राजकुमार  हिरानी को पटकथा सौ फीसदी पसंद आएगी, उस दिन फिल्म बननी शुरू हो जाएगी।


और, एक फिल्म आपकी ‘वैसा भी होता है’ भी उन्हीं दिनों रिलीज हुई थी और इस फिल्म से सबसे ज्यादा फायदा कैलाश खेर को हुआ…

बिल्कुल, उस फिल्म से तो कैलाश खेर निकल पड़े। कैलाश खेर बहुत ही प्रतिभाशाली हैं। ‘अल्लाह के बंदे’ से पहले भी जब उनको सुनता था, तो मुझे लगता था कि उस इंसान का क्या गला है, उनकी आवाज में एक अलग ही जुनून है। कैलाश अक्सर मेरे घर आया करते थे और हम सब मिलकर खाना खाते थे और कैलाश गाना सुनाया करते थे। बहुत ही मजा आता था। तभी मुझे लगा था कि वह एक दिन बहुत आगे तक जाएंगे। 


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