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आशुतोष कुमार
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
बिहार में जाति आधारित जन-गणना पर पटना हाईकोर्ट ने 4 मई को अंतरिम रोक लगाई थी। जिस समय यह रोक लगाई गई, उस समय तक कोर्ट में अमूमन इसकी संवैधानिकता पर ही बहस हुई। यह माना गया कि जन-गणना का अधिकार केंद्र को होता है, इसलिए यह राज्य सरकार के दायरे से बाहर है। लेकिन, मुद्दा इतना ही नहीं। पटना हाईकोर्ट में पांच सिविल रिट जूरिडिक्शन केस (CWJC) हैं, जिनपर सामूहिक सुनवाई अब एक बार फिर शुरू हो रही है। अभी जाति और लिंग जैसे मुद्दों पर बहस बाकी है।
पांच CWJC पर सामूहिक सुनवाई हो रही
पटना हाईकोर्ट जाति आधारित जन-गणना को लेकर दायर पांच सिविल रिट जूरिडिक्शन केस (CWJC) को एक साथ रखकर सुनवाई कर रहा था। अंतरिम आदेश के बाद अब फिर सुनवाई होगी तो यह पांचों केस चलेंगे। यूथ फॉर इक्वलिटी की ओर से दाखिल सिविल रिट जूरिडिक्शन केस (CWJC) 5542, अखिलेश कुमार की ओर से दाखिल CWJC 4624, एक सोच एक प्रयास संस्था की ओर से दाखिल CWJC 4650, रेशमा प्रसाद की ओर से दाखिल CWJC 6505 और मुस्कान कुमारी की ओर से दाखिल CWJC 6506 की सामूहिक रूप से सुनवाई होगी। CWJC 5542 के लिए अधिवक्ता अभिनव श्रीवास्तव, धनंजय कुमार तिवारी, रजत कश्यप, दीप शेखर व अमित आनंद कोर्ट में हैं। CWJC 4624 पर दीनू कुमार, रितिका रानी, हिंजा गौतम व वर्धन मंगलम याचिकाकर्ता की ओर से सरकार के सामने होंगे। CWJC 4650 पर अधिवक्ता अविनाश कुमार पांडे व ब्रजेश नाथ पांडे, केस CWJC 6505 पर शाश्वत सचिन, सुमित कुमार व शुडी भारती और CWJC 6506 पर सरकार के सामने एमपी दीक्षित, एसके दीक्षित, स्वास्तिका व संजय कुमार चौबे पक्ष रख रहे हैं।
तीन मुद्दों पर बहस हुई, चार मुद्दे अनछुए
पटना हाईकोर्ट में इन पांचों सिविल रिट जूरिडिक्शन केस का अध्ययन कर चुके अधिवक्ताओं के अनुसार अबतक हाईकोर्ट में इस प्रक्रिया की संवैधानिकता, जन-गणना के लिए जुटाए गए डाटा की सुरक्षा और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना से जुड़े बिंदुओं पर बहस हुई है। सरकार और याचिकाकर्ताओं का पक्ष सुना गया है। याचिकाकर्ताओं की ओर से दर्ज कराए गए चार अहम मुद्दे अभी अनछुए हैं…
1. जन-गणना के दौरान जातियों का नाम बदलना (जैसे, भूमिहार ब्राहमण की जगह भूमिहार शब्द का इस्तेमाल)
2. उप-जातियों को जाति के रूप में दिखाना (जैसे- बंगाली कायस्थ)
3. किन्नर को जाति बताना
4. सिखों की जाति नहीं निर्धारित करना।
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