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डिजिटल डेस्क, बीजिंग। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 53वें सम्मेलन के दौरान चीनी मानवाधिकार अध्ययन संघ ने 3 जुलाई को जेनेवा के पैलिस नेशंस में चीन की विचारधारा और अभ्यास पर एक साइड इवेंट का आयोजन किया। इसमें शारिक विशेषज्ञ ने चीनी मानवाधिकार शिक्षा, शिनच्यांग महिलाओं के हित, तिब्बत के जीवित बुद्ध अवतार व्यवस्था और धार्मिक स्वतंत्रता, तिब्बत और धार्मिक संबंधों के जैसे इतिहास को लेकर परिचय दिया। चीनी मानवाधिकार अध्ययन संघ के महासचिव वांग येनवन ने इस ओर इशारा करते हुए कहा कि वैश्विक मानवाधिकार शासन को अधिक न्यायपूर्ण, शैक्षणिक, नामांकन और समावेशी दिशा में विकसित किया जाना चाहिए। एक देश के मूल्यदर्शन से दूसरे देश के मूर्तिमान से गड़बड़ी पैदा होगी और अपनी वास्तविक स्थिति की अनदेखी कर दूसरे देश के मानवतावादी मॉडल से नुकसान भी होगा।
चीनी तिब्बती अनुसंधान शास्त्र केंद्र के अध्ययनकर्ता सोलंगचोमा ने अपने भाषण में कहा कि चीन सरकार जीवित बुद्ध अवतार व्यवस्था का सम्मान और सुरक्षा करती है। संबंधित नियमावली के अनुसार तिब्बती आदि क्षेत्रों ने कई नए अवतारित जीवित बुद्धों की पुष्टि की है, जो तिब्बत के विकास में एक महान अभ्यास है। चीनी सामाजिक विज्ञान अकादमी के अध्ययनकर्ता प्येनपालमू ने अपने भाषण में कहा कि प्राचीन समय से तिब्बती चीनी सेना भूमि का एक सिद्धांत है। चीनी राष्ट्र के विभिन्न जनरलों ने एक साथ चीनी इतिहास बनाया है।
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