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पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान।
– फोटो : अमर उजाला
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तोशखाना भ्रष्टाचार मामले में इमरान खान को बड़ी राहत मिली है। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय ने मंगलवार को तोशाखाना मामले को अस्वीकार्य घोषित कर दिया और इमरान खान की जमानत याचिका को मंजूरी दे दी। इस्लामाबाद उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति आमिर फारूक ने यह फैसला सुनाया
प्रधानमंत्री पद पर रहने के दौरान इमरान खान पर तोहफे में मिली एक बेशकीमती कलाई घड़ी के अलावा कई महंगे सामान बेचे जाने के भी आरोप लगा है। पाकिस्तान में 1974 में स्थापित, तोशखाना कैबिनेट डिवीजन के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत एक विभाग है, जो अन्य सरकारों और राज्यों के प्रमुखों और विदेशी गणमान्य व्यक्तियों द्वारा शासकों, सांसदों, नौकरशाहों और अधिकारियों को दिए गए बहुमूल्य उपहारों को संग्रहीत करता है।
एक रिपोर्ट के मुताबाकि एनएबी ने तोशाखाना मामले की जांच के सिलसिले में इमरान खान को तलब किया था। साथ ही पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष इमरान को राज्य के सभी उपहारों का रिकॉर्ड लाने के लिए कहा गया। एनएबी के नोटिस के मुताबिक, इमरान खान को तोशाखाना से 108 तोहफे मिले हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एनएबी ने बुशरा बीबी को एनसीए स्कैंडल मामले में तलब किया है, उनसे अल-कादिर ट्रस्ट समझौता से जुड़े दस्तावजों को लाने को कहा गया है।
इस बीच इमरान खान ने रविवार को आरोप लगाया कि प्रशासन ने उन्हें जेल में डालने की योजना बनाई है और उनकी गिरफ्तारी से जुड़ा पूरा घटनाक्रम पूर्व नियोजित था। अपने संबोधन में, इमरान खान ने अपने खिलाफ दर्ज सभी भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी तरह के गलत काम से इनकार किया।
पाकिस्तान के पूर्व पीएम ने कहा कि मैं चाहता हूं कि देश को पता चले कि कैसे झूठे और आधारहीन मामलों के आधार पर मुझे गिरफ्तार करने की योजना बनाई गई है। क्वेटा में एक वकील की हत्या कर दी जाती है और बिना किसी जांच और सबूत के शाहबाज शरीफ के सलाहकार उसी दिन टीवी पर आते हैं और कहते हैं कि हत्या इमरान खान ने की थी और बाद में उसी वकील की विधवा के वीडियो में दिखाया गया कि यह किसने क्या किया। इमरान ने कहा कि यह राजनीति नहीं है…यह जिहाद है। हम सभी गुलाम हैं।
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