Home Breaking News युवाओं का धार्मिक सामग्री की तरफ तेजी से बढ़ रहा रुझान, ‘आदिपुरुष’ ने गंवा दिया सुनहरा मौका

युवाओं का धार्मिक सामग्री की तरफ तेजी से बढ़ रहा रुझान, ‘आदिपुरुष’ ने गंवा दिया सुनहरा मौका

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युवाओं का धार्मिक सामग्री की तरफ तेजी से बढ़ रहा रुझान, ‘आदिपुरुष’ ने गंवा दिया सुनहरा मौका

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छोटे परदे पर धार्मिक कार्यक्रमों का रंग, रूप, दशा और दिशा सब कुछ बदल देने वाले धारावाहिक ‘देवों के देव महादेव’ के लेखक और रचनात्मक निर्देशक रहे नितिन जय शुक्ल मानते हैं कि मौजूदा युवा पीढ़ी को देश की कला, संस्कृति, धर्म और विज्ञान की ऐसी जानकारियां सहज और सरल तरीके से देने की इस समय बहुत जरूरत है, जिन पर उन्हें गर्व भी हो और जिनसे उन्हें ज्ञान भी मिले। फिल्म ‘आदिपुरुष’ को बॉक्स ऑफिस पर मिली विफलता के बारे में वह कहते हैं कि इस फिल्म का सफल होना इसलिए बहुत जरूरी था क्योंकि इससे मौजूदा लेखकों और निर्देशकों को देश की मिट्टी से जुड़ी कहानियां कहने का एक नया साहस मिलता लेकिन फिल्म का राम कथा की मूल भावना से हटना इसके लिए आत्मघाती रहा।



कलाम ने ली गीता से प्रेरणा

टेलीविजन के कई चर्चित धारावाहिकों मसलन ‘सिया के राम’, ‘चंद्र शेखर आजाद’, ‘पृथ्वी वल्लभ’ और ‘सलीम अनारकली’ आदि की कल्पना, रचना और निर्माण व निर्देशन से जुड़े रहे नितिन जय शुक्ल इन दिनों एक नई मुहिम में लगे हुए हैं और यह मुहिम है देश की थाती को नई पीढ़ी तक पहुंचाना। इसके लिए उन्होंने उज्जैन के महाकाल मंदिर से करीब दो साल पहले ‘ओम टीवी’ नामक एक ऐप लॉन्च किया। इस ऐप पर जो कहानी सबसे ज्यादा देखी जा रही है, वह है ‘कलाम- गीता स्टोरीज’। नितिन बताते हैं, ‘देश के राष्ट्रपति रहे एपीजे अब्दुल कलाम ने अपने जीवन में गीता की प्रेरणा को जितनी सहज तरीके से अपनाया, वह अपने आप में विलक्षण है और यही कहानी जब हमने अपने ऐप पर दिखाई तो ये अब तक की सबसे ज्यादा देखी जाने वाली कहानी बन गई।’


युवाओं का अध्यात्म की तरफ रुझान

इससे उत्साहित होकर ‘ओम टीवी’ ऐप के जरिये नितिन जय शुक्ल ने देश के उन शहरों में एक सर्वेक्षण भी कराया जहां मध्यमवर्गीय परिवारों की बहुलता है। टियर 2 के इन शहरों में भोपाल, विजयवाड़ा, आगरा, प्रयागराज, मदुरै, गुंटूर और इंदौर आदि शामिल रहे। सर्वे में सबसे रोचक तथ्य जो निकल कर आया, वह ये रहा ऐप का इस्तेमाल करने वालों में 18 से 30 साल के लोगों की संख्या करीब 80 फीसदी रही और इनमें से से भी अधिकतर हिंदी भाषी राज्यों के लोग रहे। इन दर्शकों की अध्यात्म में गजब की रुचि है और इसके लिए इंटरनेट पर उपलब्ध सामग्री कहीं कम है।’


आदिपुरुष से रहीं बहुत उम्मीदें

नितिन बताते हैं, ‘हमारा उद्देश्य सारगर्भित, उत्साहजनक और ज्ञान प्रदान करने वाली ऐसी भारतीय कहानियों को जन जन तक पहुंचाना है जिनके बारे में आज की युवा पीढ़ी जानना चाहती है लेकिन ये हमारी गलती है कि हम उन्हें उनके पसंद के तरीके से बता नहीं पा रहे हैं। मेरे बच्चे एवेंजर्स सीरीज का आदि, अंत सब जानते हैं। उन्हें पता है कि थानोस किस ग्रह से आया और उसकी यात्रा क्या रही, लेकिन यही बात उन्हें कंस और रावण के बारे में पता नहीं है। हाल ही में रिलीज हुई फिल्म ‘आदिपुरुष’ इस लिहाज से बहुत ही उत्साहजनक फिल्म थी, बच्चों और युवाओं में इसे देखने की खास ललक भी मैंने फिल्म की रिलीज से पहले देखी। लेकिन रिलीज के साथ ही इसके बारे में जो बातें सामने आईं, उसके बाद बच्चे तो क्या मैं खुद भी अब तक ये फिल्म देखने का साहस नहीं जुटा पाया हूं।’


दो पीढियों का पुल हैं हमारी कहानियां

युवाओं में धार्मिक कथाओं की तरफ हाल के दिनों में बढ़े रुझान की तह तक भी नितिन जय शुक्ल गए हैं। वह बताते हैं, ‘देश के मौजूदा युवाओं का धार्मिक मनोरंजन सामग्री की तरफ रुझान तेजी से बढ़ा है। इसकी तमाम वजहों में से मीडिया की तरफ बढ़ी उनकी दिलचस्पी, भारत विरोधी दुष्प्रचार, शैक्षिक दबाव, मानसिक स्वास्थ्य और एकल परिवारों का बिखराव मुख्य हैं। धार्मिक मनोरंजन सामग्री दो पीढ़ियों के बीच एक पुल का काम करती है। युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करने के साथ साथ आधुनिक दुनिया की विषमताओं को सुलझाने में ये सामग्री महत्वपूर्ण किरदार निभा सकती है बशर्ते इसे देखने के लिए ऐसा प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो, जहां ये सामग्री वह पूरे परिवार के साथ बेधड़क देख सकें। ओम टीवी ऐसा ही एक प्रयास है और जिस तेजी से इसके डाउनलोड बढ़ें हैं, उसे देखते हुए हम आशा कर सकते हैं कि इस सामग्री का देशव्यापी प्रचार देश के दूरस्थ कोनों तक शीघ्र हो सकेगा।’

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