[ad_1]

हाथ से मैला ढोने वाले सफाईकर्मी
– फोटो : यूएन हिंदी समाचार
विस्तार
सीवर की सफाई हाथों से करने की प्रथा को रोकने के लिए केंद्र सरकार पिछले 8 सालों से काम कर रही है। सीवर सफाई के दौरान होने वाली मौतों को रोकने के लिए केंद्र सरकार ने इंसानों द्वारा मेला की सफाई प्रथा को समाप्त करने के लक्ष्य पर काम शुरू किया था, इसके तहत अगस्त 2023 तक पूरे देश में इंसानों द्वारा की जाने वाली हाथों से मैला सफाई को खत्म करना था, लेकिन डेडलाइन निकट आने के बाद भी देश के दो तिहाई जिलों ने अब तक खुद को हाथ से मैला सफाई की प्रक्रिया से मुक्त होने की घोषणा नहीं की है। आंकड़ों के मुताबिक,766 जिलों में से 520 जिलों ने खुद को मैला ढोने से मुक्त घोषित कर दिया है, जबकि 246 जिलों ने अभी तक रिपोर्ट जमा नहीं की है।
यह खुलासा सामाजिक अधिकारिता व न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित राज्यों और केंद्रीय निगरानी समिति की आठवीं बैठक में हुआ है। इस बैठक में बुधवार को देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। तीन साल के कोरोना काल के बाद हो रही बैठक इसलिए भी अहम है, क्योंकि आम बजट में हाथ से मैला सफाई को रोकने के लिए विशेष प्रावधान किए गए हैं।
सामाजिक न्याय मंत्री वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में केंद्रीय निगरानी समिति की आठवीं बैठक में इस मामले पर चर्चा हुई। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि मैं संबंधित राज्यों से एक रिपोर्ट सौंपने के लिए कहेंगे। हम अगस्त 2023 तक भारत को मैला ढोने की प्रथा से मुक्त घोषित करने के अपने दृष्टिकोण के लिए प्रतिबद्ध हैं।
[ad_2]
Source link