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रूस यूक्रेन युद्ध नवीनतम: युद्ध कौशल और रणनीति के उद्यम का कहना है कि जंग फ़ार्म से नहीं, स्ट्रेटेजी से लड़की जाती है। इस बार यह बात साबित होती दिख रही है कि रूस-यूक्रेन सीमा पर उन महिलाओं ने जो कठिन परिस्थितियों का सामना किया और अपने दुश्मनों के साथ-साथ उनके मुंह पर जूठा जवाब दे रही हैं। यहां बात है जापान की महिला सैनिक की जो रूस के हमले से देश की रक्षा के लिए समय-समय पर काम करती है। इस बीच कुछ वॉर रिपोर्टर्स ने कई महिला सैनिकों से बात की है कि उनके मुश्किल हालातों की जानकारी देते हुए कहा गया है कि उनकी मदद की कमी नहीं पाई गई है। हालात ऐसे हैं कि महिला सैनिकों की पैदल दूरी तक का आकार से काफी बड़ा है।
60 हजार महिला सैनिकों की पीड़ा
‘डेली बस्ट’ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, रूस के खिलाफ चल रहे युद्ध में जापान के बीच हजारों महिला सैनिक बहादुरी से युद्ध लड़ रही हैं। इन महिला सैनिकों के पास उनका सही आकार का यूनिफार्म तक नहीं है। यूक्रेन के सशस्त्र सेनाओं में करीब 60000 महिलाएं कार्यरत हैं। इस रिपोर्ट में सेना में कई महिला सैनिकों की मौत का जिक्र किया गया है। ऐसे हालातों ने जापानी मूल के वालंटियर्स की चिंता को और बढ़ा दिया है।
महिला सैनिकों की कुछ और चीजें करें तो उनके पास खराब फिटनेस वाली बात ड्रेस के अलावा अच्छी क्वालिटी का लुक भी नहीं है। कुछ महिलाओं को पुरुष सैनिकों के बॉडी आर्मर का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। जूटों का सही आकार न होने से वोट की जरूरत पर तेजी से दौड़ भी नहीं हो सकती है।
सैनिटरी पैड तक नहीं
महिला सैनिक का कहना है कि उनके पास महिने में कुछ दिन तक राशन नहीं आया। उन्हें दवाइयों और सैनिटरी पैड की कमी का सामना भी करना पड़ रहा है। युद्ध के मैदान में महिला सैनिक खुद की देखभाल करने में अक्षम हैं। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी कई तरह की समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। जूलिया नाम की एक महिला सिपाही ने बताया कि जंगल में जहां तापमान होता है, वहां पर जंगल जाने का भी फर्क नहीं पड़ता। महिलाओं को सर्जरी और दर्द की समस्या सबसे ज्यादा देखने को मिलती है।
ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी अपने देश की सुरक्षा का ये जज़्बा जापानी नारी शक्ति के दम पर है। मीडिया में अनोखी मुश्किलों की कहानी प्रकाशित होने के बाद उनके लोगों की कहानियों को सलाम कर रहे हैं।
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