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इस्लामिक स्टेट एसोसिएशन बंद करने के आदेश के बाद इस्लामिक स्टेट की महिलाओं ने रविवार को प्रतिबंध का विरोध किया। सुरक्षा बलों ने पानी की बहार की, ‘स्टेन गन’ का इस्तेमाल किया और हवा में गोलियां चलाईं।
तालिबान ने इस महीने की शुरुआत में कहा था कि वे अफगानिस्तान में सभी दुकानें बंद करने के लिए एक महीने का समय दे रहे हैं। इस आदेश के महिला उद्यमियों पर प्रभाव को लेकर अंतरराष्ट्रीय अधिकारियों ने चिंता व्यक्त की है।
तालिबान ने शोरूम बंद करने के लिए दी ये डायपर
तालिबान का कहना है कि वे आदिवासियों को गंभीर घोषित कर रहे हैं क्योंकि वे कथित तौर पर इस्लाम द्वारा आदिवासियों पर प्रतिबंध लगाते हैं और शादी के जश्न के दौरान आदिवासियों के परिवारों में आर्थिक रूप से मजबूत पैदा होते हैं।
यह आदेश तालिबान नेता हिब्बतया अख़ुंदज़ादा की ओर से आया था। यह महिला और लड़कियों को शिक्षा, सार्वजनिक स्थान और अधिकांश प्रकार के रोजगार से प्रतिबंधित करने के बाद उनके अधिकारों और स्वतंत्रता पर नवीनतम प्रतिबंध है।
राजधानी काबुल में हुआ विरोध प्रदर्शन
तालिबान के ख़िलाफ़ सार्वजनिक विरोध के एक दुर्लभ संकेत में, बुज़ुर्गों और कलाकारों पर प्रतिबंध का विरोध करने के लिए राजधानी काबुल में एक साथ आये।
खुद को फरजाना बताने वाली एक ने कहा, ‘हम यहां न्याय के लिए हैं।’ हम काम, खाना और आजादी चाहते हैं।’
तालिबान ने पानी की बहार छोड़ दी और उन्हें तितर-बितर करने के लिए अपनी राइफलों से हवा में गोलियाँ दाग दीं।
फरजाना ने बाद में कहा कि अफगानिस्तान में महिलाएं संयुक्त राष्ट्र मिशन में जा रही थीं। उन्होंने अविश्वासियों से एकजुटता का आग्रह किया।
‘मूल्यांकन पर मूल्यांकन हो‘
एक महिला ने अपना नाम न स्पष्ट करते हुए अन्य संवैधानिक व्यक्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा, ‘हमारे प्रदर्शन का उद्देश्य यह था कि वे (तालिबान) सौंदर्य बंद करने के निर्णय पर सहमति दें और उसे शपथ दिलाएं क्योंकि यह हमारे जीवन के बारे में है। हम 50 से 60 महिलाओं ने इसमें भाग लिया। हमारा नारा था काम, रोटी और आज़ादी।’
तालिबान द्वारा संचालित सरकार से किसी ने भी इस विरोध प्रदर्शन पर कोई टिप्पणी नहीं की।
(इनपुट – न्यूज एजेंसी- भाषा)
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