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जापान कांवर यात्रा: सावन (सावन) के महीने में देशों के प्रमुख देशों में शिव भक्तों द्वारा निकाली गई कांवर यात्रा (कांवड़ यात्रा) और भगवान महादेव (भगवान शिव) का जलाभिषेक किया जाता है। बिहार सरकार के बिहार फाउंडेशन ने अपने ट्विटर हैंडल से जापान की राजधानी टोक्यो में दर्शन यात्रा की जानकारी साझा की है। बता दें कि भगवा रंग के कपड़े पहने शिव भक्तों ने टोक्यो में श्री राधा कृष्ण मंदिर से पिरामिड यात्रा की और सीतामा शिव मंदिर में महादेव का जलाभिषेक कर चमत्कार यात्रा का समापन शुरू किया। इस दौरान शिव भक्त ने कैथेड्रल में गंगाजल लेकर 80 किमी से अधिक की दूरी तय की। सिद्धार्थ की यात्रा गंगा जल बिहार के सुल्तानगंज से टोक्यो लाई गई थी।
जापान में चित्रित स्मारक यात्रा
बता दें कि जापान में भारत के राजदूत सी. बी. जॉर्ज भी आर्काइव के उद्घाटन समारोह में शामिल हुए। जानकारी के अनुसार, जापान में आयोजित इस पुरातात्विक यात्रा में करीब 500 शिवभक्त शामिल हुए। सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि नेपाल और श्रीलंका के लोगों ने भी इस यात्रा में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
82 KM लंबी स्टूडियो यात्रा
जान लें कि पुरातत्व यात्रा की शुरुआत श्री राधा कृष्ण मंदिर से हुई। फिर सीतामाता शिव मंदिर में जलाभिषेक के साथ कैथेड्रल यात्रा का समापन हुआ। शिव भक्तों ने आर्कालॉजी में गंगाजल लेकर करीब 82 किलोमीटर की दूरी तय की। सिद्धार्थ का गंगाजल बिहार के सुल्तानगंज से टोक्यो तक पहुंच गया। जापान में पुरातन आर्काइव यात्रा में साक्षात वैभव उत्साह शामिल है।
क्लासिक यात्रा में क्या होता है?
बता दें कि सावन के महीने में चमत्कारिक यात्राएं निकाली जाती हैं। प्राचीन गंगा नदी से जल तीर्थयात्रा मंदिर जाते हैं और वहां पर शिवलिंग का जलाभिषेक किया जाता है। यूपी, बिहार और दिल्ली में टूरिस्ट का क्रेज़ बहुत देखने को मिलता है। लोग हरिद्वार और अन्य तीर्थस्थलों पर विक्रेता कलश में गंगा जल लेते हैं और शिवलिंग पर चढ़ाते हैं। इस बार भारत के बाहर जापान में भी ऐतिहासिक यात्रा की गई।
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