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Mayawati
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने तय किया है कि उनका सियासी गठबंधन किसी से नहीं होगा। इसी के साथ बसपा आने वाले चुनावों में फिलहाल अकेले ही सियासी मैदान में नजर आएगी। लेकिन राजनीतिक जानकारों का कहना है कि मायावती की किसी भी दल से गठबंधन न करने की योजना फिलहाल इस साल होने वाले वाले विधानसभा के चुनावों तक के लिए ही लग रही है। जैसे ही लोकसभा चुनाव से पहले के राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव खत्म होंगे, तो मायावती के असली सियासी पत्ते खुलने शुरू होंगे। फिर तय होगा कि मायावती राजनीतिक गठबंधन का रुख किस ओर जाएगा।
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चार राज्यों में मायावती का होगा अकेले लड़ने वाला टेस्ट
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि लोकसभा चुनावों से पहले जितने राज्यों में विधानसभा के चुनाव होंगे, वहां पर मायावती फिलहाल अकेले ही सियासी मैदान में नजर आएंगी। इसमें इस साल होने वाले चार राज्यों के चुनावों में राजस्थान, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना शामिल हैं। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषण जटाशंकर सिंह कहते हैं कि जिन राज्यों में इस साल चुनाव होने हैं मायावती वहां पर अकेले चुनाव लड़कर अपनी पार्टी का सियासी कद आंकना चाह रही हैं। वह कहते हैं इन राज्यों में होने वाले विधानसभा के चुनावों के परिणाम और बहुजन समाज पार्टी को मिले वोट प्रतिशत से लोकसभा के चुनावों में होने वाले गठबंधन की दशा और दिशा मायावती तय करेंगी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मायावती ने जो भी योजना बनाई है, वह फिलहाल इस साल होने वाले चार राज्यों के विधानसभा के चुनावों के मद्देनजर ही बनती हुई नजर आ रही है।
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