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क्या मोदी मंत्रिमंडल का होने वाला विस्तार अब सियासी दांव-पेंच में उलझ गया है या मानसून सत्र के बाद एक बार फिर से मोदी के मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावना है। सियासी गलियारों में अभी भी मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं हो रही है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि मोदी मंत्रिमंडल के विस्तार की संभावनाएं फिलहाल जल्दी नजर नहीं आ रही हैं। इसके पीछे उनका तर्क है कि जिन राज्यों में विधानसभा के चुनाव होने हैं, वहां के नेताओं की पहले ही मोदी मंत्रिमंडल में मजबूत हिस्सेदारी है। एनडीए के घटक दलों की बैठक के बाद जो सियासी समीकरण बने हैं, उसमें भी फिलहाल किसी भी राज्य के नेता को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की संभावनाएं नहीं बन रही है। हालांकि, कुछ सियासी जानकारों का मानना है कि मानसून सत्र के बाद मोदी कैबिनेट में 2024 के लोकसभा चुनावों के मद्देनजर छोटा सा फेरबदल हो सकता है।
इसलिए लगाए जा रहे हैं यह कयास
सियासी जानकारों का कहना है कि इस साल होने वाले चार राज्यों के विधानसभा चुनावों से पहले एक बार अटकलें लगाई जा रही थी कि जल्द ही मोदी मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। कयास तो यह लगाए जा रहे थे कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के फ्रांस जाने के पहले ही मोदी कैबिनेट में कुछ फेरबदल किए जा सकते हैं, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
राजनीतिक विश्लेषक हरिकिशन शर्मा बताते हैं कि इस साल होने वाले मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना के नेताओं की मोदी कैबिनेट में हिस्सेदारी है। वह कहते हैं कि मध्य प्रदेश से पांच सांसद मोदी की कैबिनेट में हैं। नरेंद्र सिंह तोमर, वीरेंद्र सिंह, ज्योतिरादित्य सिंधिया, पहलाद पटेल और फग्गन सिंह कुलस्ते शामिल हैं। इसलिए मध्यप्रदेश में आने वाले विधानसभा के चुनावों को देखते हुए फिलहाल तो ऐसी संभावना नहीं बन रही है कि वहां से किसी नेता को मंत्रिमंडल में शामिल कर विधानसभा के चुनावों में सियासी निशाना लगाया जाए।
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