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पोर्ट ऑफ स्पेन. क्या आप वेस्टइंडीज में ‘गंगा जूस सेंटर’ या ‘मोक्ष मेलन’ जैसी दुकान या डिश की कल्पना कर सकते हैं. बनारस या अस्सी घाट का एहसास पा सकते हैं. आपका जवाब जो भी हो लेकिन वेस्टइंडीज में ना सिर्फ ऐसी जगह है, बल्कि यह काफी लोकप्रिय भी है. भारतीयता का एहसास कराने वाला यह सेंटर त्रिनिदाद एंड टोबैगो में है, जिसे सुनील गावस्कर अपना दूसरा घर मानते हैं. इसी त्रिनिदाद एंड टोबैगो में प्रणीता तिवारी गंगा जूस एंड फ्रूट सेंटर चलाती हैं. प्रणीता वेस्टइंडीज के पूर्व क्रिकेटर और कॉमेंटेटर डैरेन गंगा की पत्नी हैं. हिंदी और भोजपुरी बिंदास बोलने वालीं प्रणीता तिवारी से न्यूज18हिंदी ने एक्सक्लूसिव बात की. बातचीत के प्रमुख अंश:
आपका बनारस से क्या रिश्ता है?
मेरा जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ. लेकिन मुझे हिंदी में बात करना पसंद है. मेरे भाई-बहन ये हिंदी सुनकर खूब हंसेंगे. लेकिन मुझे जब भी मौका मिलता है तब हिंदी में बात कर लेती हैं. मेरे मम्मी-पापा और परिवार बनारस से है. हम लोग अस्सी घाट पर रहते हैं. मैं बहुत बार बनारस गई हूं. मेरे फूफा बनारस में ही रहते हैं.’
वेस्टइंडीज में शॉप खोलने का आइडिया कैसे आया?
मैं शुरुआत से ही अपना कुछ करना चाहती थी. मुझे इंडियन होने का गर्व है. इसीलिए मैं ऐसा कुछ काम करना चाहती थी जिससे अपनी जड़ों से जुड़ाव महसूस हो. मैं भले ही भारत में पैदा नहीं हुई. फिर भी अपने रूट्स से काफी करीब हूं.
बनारस वाला आइडिया कैसे आया?
2020 में जब लॉकडाउन हुआ तब मैं त्रिनिदाद आई. मैंने देखा कि यहां कोई जूस बार ही नहीं है. वो भी फ्रेश जूस. वो नहीं, जोसुपरमार्केट में मिलता है. जबकि जब मैं न्यूयॉर्क में रहती थी, तब वहां यह सब आसानी से मिल जाता था. ऐसे में मुझे ऐसी शॉप खोलने का विचार आया. डैरेन गंगा से बात हुई तो उन्होंने भी सपोर्ट किया. मैं बचपन से ही अदरक वाली चाय पीती थी. लगा कि इस आइडिया पर काम किया जाए. हम लोग इंडिया से हैं. इसलिए कई डिश इंडिया को ध्यान में रखकर बनाईं. जैसे कि हल्दी-अदरक वाला वेलनेस शॉट्स, जो जल्दी ही बहुत पॉपुलर हो गया.
आपकी कई डिश के नाम इंडियन हैं. वो क्यों भला?
हमने यहां ऐसी कई डिशेज रखी हैं, जो मैंने मां, नानी या डैरेन की मां से सीखी हैं. इसी तरह एक डिश का नाम मोक्ष मेलन है, जो श्रीलंका से लिया गया है. इसी तरह हमने वाराणसी से सी लेकर विटामिन सी पर आधारित सूप बनाई है. इसमें ऑरेंज, लेमन, गार्लिक, जिंजर… मिलाकर सूप दिया जाता है.
अस्सी घाट की तस्वीर का क्या मैसेज है?
मैंने यहां पर एक तस्वीर लगाई जो मुझे बनारस यानी काशी के अस्सी घाट की याद दिलाती है. अस्सी घाट में मेरा परिवार, चाची, फूफा सब वहीं रहते हैं. मैं कई बार वहां जाती हूं. अस्सी घाट की यह तस्वीर देखकर लोग इस जगह को जानना चाहते हैं. मैं जब उन्हें बताती हूं तो मुझे खुशी होती है. त्रिनिदाद के कई लोग वहां जाना चाहते हैं.
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FIRST PUBLISHED : July 25, 2023, 19:44 IST
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