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PM Modi
– फोटो : Social Media
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मणिपुर हिंसा को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष, आमने-सामने हैं। लोकसभा अध्यक्ष ने विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस स्वीकार कर लिया है। अगले सप्ताह पीएम मोदी इस मुद्दे पर सदन में बोल सकते हैं। अंदर खाते इसकी तैयारी भी शुरु हो गई है। मणिपुर हिंसा का मुद्दा, जिस पर संसद में लगातार गतिरोध जारी है, वह प्रधानमंत्री मोदी के लिए ‘हरक्यूलिस’ टास्क है। यानी वो कठिन कार्य, जिसके लिए अथक प्रयास या ताकत लगानी होती है।
केंद्र सरकार का प्रयास है कि संसद में पीएम मोदी के बोलने से पहले ‘मणिपुर’ शांत हो जाए। हिंसा ग्रस्त इलाकों में तैनात सेना, अर्धसैनिक बलों और लोकल पुलिस के एक लाख से अधिक जवानों को ‘बफर’ जोन तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई है। मतलब, कुकी और मैतेई, दोनों समुदाय के एक दूसरे के क्षेत्रों में आकर कोई वारदात न करें। केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा अब एक ही दिन में मणिपुर सरकार के साथ कई बार बातचीत की जा रही है। पुलिस थानों से लूटे गए लगभग तीन हजार घातक हथियार और ढाई लाख कारतूसों की बरामदगी के लिए सर्च आपरेशन शुरु किया गया है। संभव है कि कुकी और मैतेई समुदाय के कुछ प्रतिनिधियों को दिल्ली बुलाया जाए।
संसद में पीएम बोलें, विपक्ष इसे मान रहा अपनी जीत
विपक्ष को मालूम है कि अविश्वास प्रस्ताव पर उसकी हार तय है। वजह, लोकसभा में विपक्ष के पास पर्याप्त बहुमत नहीं है। इसके बावजूद विपक्षी दल, हार में अपनी जीत देख रहे हैं। अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले कांग्रेस पार्टी के सांसद गौरव गोगोई कहते हैं, देखिये, ये हार जीत का सवाल नहीं है। यह विपक्ष का संवैधानिक दायित्व है। ये इंसाफ की लड़ाई है। विपक्षी दलों का गठबंधन ‘इंडिया’ चाहता है कि लोकतंत्र जीवित रहे।
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