Home World Radioactive water plan: जापान की इस योजना से ‘ड्रैगन’ डरा, सीधे सीधे गंभीर नतीजों की दी धमकी

Radioactive water plan: जापान की इस योजना से ‘ड्रैगन’ डरा, सीधे सीधे गंभीर नतीजों की दी धमकी

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Radioactive water plan: जापान की इस योजना से ‘ड्रैगन’ डरा, सीधे सीधे गंभीर नतीजों की दी धमकी

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Japan Radioactive Plant News: जापान उन कुछ खास देशों में शामिल है जहां बिजली उत्पादन में एटॉमिक पावर प्लांट की अहम भूमिका है. परमाणु संयंत्रों में इस्तेमाल किया गया पानी रेडियोएक्टिव तत्व पाए जाते हैं जिन्हें वैज्ञानिक भाषा में रेडियोएक्टिव वाटर कहा जाता है. अब सवाल यह है कि चीन को क्यों डरा हुआ. चीन क्यों जापान के इस रेडियोएक्टिव वाटर को एक योजना की तरह देख रहा है. चीन का मानना है कि अगर जापान इस पानी को समंदर में छोड़ता है तो पैंडोरा बाॉक्स की तरह होगा. दरअसल पैंडोरा बाक्स का मतलब यह है कि जब आप किसी फैसले को अमल में लाते हैं तो उससे अनगिनत परेशानयों का जन्म होता है जिसकी आप कल्पना नहीं करते.

चीन ने दी धमकी

चीन का कहना है कि अगर जापान रेडियोएक्टिव वाटर को समंदर में छोड़ता है तो उसका असर जलीय पौधों और जन्तुओं पर तो पड़ेगा इसके साथ ही इंसानों पर भी बुरा असर होगा. जापान को अंतरराष्ट्रीय जगत को भरोसे में लेकर फैसला करना चाहिए. अगर वो ऐसा नहीं करता है तो कड़े विरोध का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए. यही नहीं इसका नकारात्मक चेन रिएक्शन भी होगा.जापान की इस योजना के बाद हांगकांग स्पेशल एडिमिनिस्ट्रेटिव रीजन ने  जापान से आयात होने वाली सब्जियों पर निगरानी बढ़ा दी है. इसके साथ ही निगरानी के दायरे में सीफूड को लाए जाने पर विचार कर रहा है. फिलहाल जापान से आयात होने वाले फूड, बेवरेज, अल्कोहल, मिठाइयों पर निगरानी का असर भी पड़ रहा है. इसके साथ ही जापानी निर्यातकों के सामने भी संकट उठ खड़ा हुआ है. चीन ने तो फुकुशिमा से आयात होने वाले सामानों पर पहले ही बैन लगा दिया है.

पैंडोरा बाक्स है रेडियो एक्टिव वाटर प्लान

चीन का साफ तौर पर कहना है कि अगर जापान ने अपने रेडियोएक्टिव वाटर प्लान योजना को नहीं त्यागा तो गंभीर नतीजे सामने आएंगे, जापान को अपने इस स्वार्थी योजना को छोड़ना पड़ेगा. अगर जापान ऐसा नहीं करता तो क्षेत्री. स्तर पर फूड सप्लाई पर होने वाला प्रभाव सबके सामने होगा.जापान की योजना के बारे में लंबे समय से चीन, आसियान, प्रशांत द्वीप देशों और अन्य सहित दुनिया भर से विरोध और सवाल उठते रहे हैं, जिनके प्रत्यक्ष शिकार होने की संभावना है जो भौगोलिक कारणों से परमाणु-दूषित जल से घिरे होंगे.गंभीर और अप्रत्याशित परिणामों को देखते हुए, जापान को परमाणु-दूषित पानी को वैज्ञानिक सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से संभालने के समाधान पर बातचीत करने के लिए हितधारकों के साथ घनिष्ठ परामर्श करना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य से, इसने केवल जनसंपर्क में भारी निवेश किया है, कथित तौर पर डंपिंग योजना के समर्थन के बदले में अमेरिका, कुछ यूरोपीय देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के साथ राजनीतिक सौदे किए हैं.

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