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पाकिस्तान संकट
– फोटो : Social Media
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पाकिस्तान में आम चुनाव कराने में संभावित देरी के कारण कार्यवाहक सरकार का कार्यकाल लंबा खिंचने पर पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) का तीन अरब डॉलर का राहत पैकेज खतरे में पड़ सकता है। आईएमएफ ने जून में पाकिस्तान के साथ 2250 करोड़ एसडीआर (करीब तीन अरब डॉलर) की राशि के लिए नौ महीने की स्टैंड-बाय व्यवस्था (एसबीए) पर स्टाफ स्तर का समझौता किया था।
‘द न्यूज’ की खबर के अनुसार काउंसिल ऑफ कॉमन इंटरेस्ट (सीसीआई) की ओर से पहली बार डिजिटल जनगणना को मंजूरी दिए जाने के बाद परिसीमन की कवायद शुरू होने जा रही है, ऐसे में पाकिस्तान में चुनाव में तीन महीने से अधिक की देरी होने की संभावना है।
परिसीमन की कवायद में चार महीने का समय लगता है जबकि चुनाव प्रक्रिया को पूरा करने के लिए दो महीने और चाहिए। अखबार की खबर के अनुसार मौजूदा परिस्थितियों में राजनीतिक बदलाव की प्रक्रिया को पूरा करने के लिए कार्यवाहक सरकार का कार्यकाल कम से कम छह महीने तक बढ़ाना पड़ सकता है। इस बीच, ऊर्जा पर कैबिनेट समिति (सीसीओई) ने संशोधित परिपत्र ऋण प्रबंधन योजना (सीडीएमपी) को मंजूरी दे दी है, जिसे संघीय मंत्रिमंडल से मंजूरी मिलने के बाद, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ साझा किया जाएगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अभी यह देखा जाना बाकी है कि आईएमएफ परिकल्पित लक्ष्यों पर संशोधित सीडीएमपी का जवाब कैसे देगा। इसमें कहा गया है कि जब तीन अरब डॉलर का स्टैंडबाय अरेंजमेंट (एसबीए) कार्यक्रम तैयार किया गया था तो यह परिकल्पना की गई थी कि इसे तीन अलग-अलग सरकारों के कार्यकाल के दौरान पूरा किया जाएगा। 1.2 अरब डॉलर की पहली किस्त निवर्तमान पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट के नेतृत्व वाली सरकार के कार्यकाल के दौरान जारी की गई थी। खबर में कहा गया है कि ऐसा माना जा रहा है कि पहली समीक्षा अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों के पहली तिमाही (जुलाई-सितंबर) के आंकड़ों के आधार पर की जाएगी और कोष की ओर से अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में इस्लामाबाद में अपने समीक्षा मिशन को भेजने की संभावना है।
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