[ad_1]
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित नए विधेयक को लेकर गुरुवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला और कहा कि यह चुनाव निगरानी संस्था को प्रधानमंत्री के हाथों की कठपुतली बनाने का प्रयास है। आम आदमी पार्टी (आप) ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी भारतीय लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं और नियुक्त होने वाले चुनाव आयुक्त भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रति वफादार होंगे। वहीं, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यह 2024 के चुनाव में धांधली की दिशा में एक स्पष्ट कदम है।
कांग्रेस नेताओं ने सभी लोकतांत्रिक ताकतों से प्रस्तावित कानून का विरोध करने की अपील करते हुए सवाल किया कि क्या बीजू जनता दल (BJD) और वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) भी विधेयक का विरोध करने के लिए हाथ मिलाएंगे। बीजद और वाईएसआर कांग्रेस द्वारा राज्यसभा में सरकार को महत्वपूर्ण मुद्दों पर समर्थन दिया जाता रहा है क्योंकि उच्च सदन (राज्यसभा) में भाजपा के पास बहुमत नहीं है।
विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने गुरुवार को राज्यसभा में मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों (नियुक्ति, सेवा शर्तें और पदावधि) विधेयक, 2023 पेश किया। विपक्षी सदस्यों के विरोध के बीच उन्होंने यह विधेयक दोपहर के भोजन के बाद के राज्यसभा में पेश किया, जिसके बाद सदन स्थगित कर दिया गया। कांग्रेस महासचिव (संगठन) केसी वेणुगोपाल ने सरकार पर निशाना साधा और इस विधेयक को चुनाव आयोग को प्रधानमंत्री के हाथों की कठपुतली बनाने का प्रयास बताया।
[ad_2]
Source link