[ad_1]
हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अगस्त के पहले हफ्ते में राजधानी दिल्ली में डेंगू के 105 नए मामले रिपोर्ट किए गए हैं, जिसके बाद अब राष्ट्रीय राजधानी में इस साल कुल संक्रमितों की संख्या 350 के आंकड़े को पार कर गई है। जुलाई के आखिर तक दिल्ली में कुल रोगियों की संख्या इस साल 243 रिपोर्ट की गई थी।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगस्त-सितंबर के महीनों में देशभर में डेंगू के मामले हर साल बढ़ते हुए देखे जाते रहे हैं, इसको ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
अमर उजाला से बातचीत में ग्रेटर नोएडा स्थित अस्पताल में इंटेंसिव केयर के डॉक्टर श्रेय श्रीवास्तव बताते हैं, हर साल की तरह इस बार भी अगस्त के महीने में राजधानी में मच्छर जनित रोगों के मामलों में इजाफा देखा जा रहा है, हालांकि ज्यादातर लोग सामान्य उपचार के साथ ठीक होकर घर वापस जा रहे हैं। हालांकि सुरक्षात्मक रूप से डेंगू से बचाव के उपाय करते रहना आवश्यक है।
जिस तरह से राजधानी में पिछले दिनों बारिश और जलजमाव की स्थिति रही है उसके कारण इस साल रोग का जोखिम अधिक हो सकता है।
कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जाता रहा है कि दिल्ली सहित कुछ राज्यों में डेंगू के एक गंभीर स्ट्रेन DENV-2 के मामले रिपोर्ट किए गए हैं, जो अपेक्षाकृत अधिक गंभीर रोग का कारण बन सकते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस प्रकार के डेंगू के कारण रक्तस्रावी बुखार होने का खतरा अधिक हो सकता है जो गंभीर रोगों को बढ़ाने वाली स्थिति मानी जाती है।
कुछ प्रकार की शारीरिक समस्या वाले लोगों में इस स्ट्रेन के कारण गंभीर रोग विकसित होने का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कुछ लोगों में गंभीर स्ट्रेन और रोग होने का जोखिम अधिक हो सकता है। डायबिटीज मेलिटस, हृदय रोग, लिवर के रोग, किडनी की बीमारियां, कैंसर जैसी इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज़िंग समस्या वाले लोगों में इसके गंभीर रोग का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों में मच्छर जनित रोगों से विशेष बचाव के उपाय करते रहने की आवश्यकता है। क्रोनिक बीमारी वाले लोगों में डेंगू की स्थिति गंभीर हो सकती है।
डेंगू से बचाव के लिए मच्छरों को काटने से बचाव करते रहना जरूरी है। डेंगू के मच्छर दिन के समय अधिक काटते हैं। दिन के समय में दरवाजे और खिड़कियों को बंद रखें जिससे घर में मच्छरों के प्रवेश के कम किया जा सके। पूरी आस्तीन के कपड़े पहनें, जिससे मच्छरों के काटने से बचा जा सके। इसके अलावा मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास साफ-सफाई रखें और रात में सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें।
————–
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
[ad_2]
Source link