Home Breaking News किसने दी बहनों को जहर खाने की सलाह, आखिर क्यों मुसलमानों के खून का प्यासा हुआ तारा सिंह!

किसने दी बहनों को जहर खाने की सलाह, आखिर क्यों मुसलमानों के खून का प्यासा हुआ तारा सिंह!

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किसने दी बहनों को जहर खाने की सलाह, आखिर क्यों मुसलमानों के खून का प्यासा हुआ तारा सिंह!

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फिल्म ‘गदर 2’ ने रिलीज के 12वें दिन भी शानदार कमाई करते हुए घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 400 करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर लिया है। लोगों को इस फिल्म के हीरो तारा सिंह में एवेंजर्स जैसी फीलिंग आ रही है। खुद सनी देओल भी यही कह रहे हैं कि तारा सिंह भारतीय सिनेमा में मार्वल जैसा एवेंजर है। बड़े परदे पर ये किरदार पहली बार फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ में साल 2001 में दिखा था। अमृतसर में ट्रक चलाने वाला साधारण सा जट कैसे मुसलमानों का हत्यारा बना, आइए चलते हैं थोड़ा पीछे और जानते हैं इस किरदार के अतीत के बारे में।



फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ शुरू ही तारा सिंह के परिवार से होती है। अभिनेता प्रमोद माउथो फिल्म में तारा सिंह के पिता बने हैं। उनका मानना है कि बंटवारे के बाद भी पाकिस्तान में हिंदू और सिख सुकून से रह सकते हैं लेकिन एक दिन पुलिस कुछ और ही एलान करती है। तारा सिंह इस पूरे सीन में कहीं नहीं दिखता। बस उसके पिता, उसकी मां और उसकी दो बहनें सामान बांधती परेशान हाल में दिखती हैं। इसी बीच तारा सिंह की मां दो पुड़िया लेकर आती है और अपनी बेटियों को देना चाहती है, पर दे नहीं पाती। इस पर तारा सिंह का पिता ये पुड़िया अपनी बेटियों को देता है और कहता है कि अगर कोई तुम्हारी अस्मत पर हाथ डाले तो इसे खा लेना।


इसी सीन में ‘गदर एक प्रेमकथा’ में तारा सिंह के दोस्त गुल्लू की भी एंट्री होती है। ये किरदार फिल्म ‘गदर 2’ में भी दिखाई देता है। लाहौर से अमृतसर के लिए निकले तारा सिंह के पूरे परिवार का ट्रेन में कत्ल कर दिया जाता है। दोनों बहनों के साथ अनाचार होता है और स्टेशन पर पहुंची ट्रेन में अपने परिजनों की लाशें देखकर तारा सिंह का खून खौल जाता है। लेकिन, ये जानकर आपको हैरानी होगी कि फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ की जो मूल कहानी इसके लेखक शक्तिमान ने लिखी थी, उसमें इस पूरी घटना का जिक्र ही नहीं था।


फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ के निर्माता नितिन केनी ‘अमर उजाला’ को एक खास बातचीत में बताते हैं, ‘मैंने फिल्म के निर्देशक अनिल शर्मा से तब कहा था कि अगर हीरो तलवार उठता है, तो उसकी कुछ वजह होनी चाहिए। शक्तिमान और अनिल शर्मा का मानना था कि उस समय तो हर नौजवान तलवार उठा रहा था फिर तारा सिंह को लेकर लोग एतराज क्यों करेंगे। मेरा तर्क था कि तारा सिंह बात बात में  शांति और अमन की बात करता है। वह अचानक तलवार कैसे उठा सकता है?  कहानी में कुछ पिरोना पड़ेगा कि जो उसके तलवार उठाने की ठोस वजह बने। उस समय समझ में नहीं आ रहा था कि क्या करें। फिर कहानी में ये किस्सा लाया गया कि तारा सिंह का ट्रेन में पाकिस्तान से आ रहे तारा सिंह के पूरे परिवार को दंगाइयों ने काट डाला है। इस सीन को फिल्म की शूटिंग पूरी होने के बाद कमालिस्तान स्टूडियो में अलग से फिल्माया गया और तभी इस सीन में सनी देओल नहीं हैं।’


फिल्म ‘गदर एक प्रेमकथा’ की कहानी में दंगाइयों से भागती सकीना अपनी जान बचाने की कोशिश मे तारा सिंह से टकराती है। तारा उससे पहले ही उस स्कूल में मिल चुका होता है जहां वह अपने ट्रक से रोजमर्रा की जरूरतें पहुंचाने जाता है। तारा उसे मैडमजी कहकर बुलाता है और सकीना भी पूरा सम्मान देते हुए एक ट्रक ड्राइवर को ताराजी ही कहकर बुलाती है। दोनों की प्रेम कहानी में अमीरी और गरीबी का ये फासला बहुत रोचक रंग भरता है। और, सकीना के मिलने के बाद ही तारा सिंह हिंसा का रास्ता छोड़ देता है।


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