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Yutu-2 Rover on Moon: चांद के दरवाजे पर चंद्रयान 3 चक्कर लगा रहा है. 23 अगस्त को शाम 6 बजकर चार मिनट पर सॉफ्ट लैंडिंग की पूरी तैयारी हो चुकी है.अगर किसी तरह की तकनीकी दिक्कत सामने नहीं आई तो भारत स्पेस जगत में एक और मुकाम हासिल कर लेगा. चंद्रयान-3 की लैंडिंग से पहले 21 अगस्त को इसरो ने तस्वीर साझा कर यह बताया कि किस हिस्से पर विक्रम लैंडर को उतारने की तैयारी है. इन सबके बीच चीन का रोवर भी चांद की सतह को समझने की कोशिश कर रहा है, यूटू-2 रोवर के जरिए चीन, चांद की सतह की तहकीकात में जुटा हुआ है.
यूटू-2 रोवर
चेंज ई-4 लैंडर के जरिए यूटू-2 रोवर को चांद पर उतारा गया था. खास बात यह है कि यूटू-2 पहली बार चांद की सतह से करीब 300 मीटर नीचे दाखिल हुआ और जो जानकारी भेजा है वो हैरान करने वाली है. इसमें लूनर पेनटेरेटिंग रडार लगाया गया है जिसके जरिए वो अलग अलग गहराई वाले जगहों की जानकारी देने में सक्षम है. 2020 में यूटू-2 ने 40 मीटर की गहराई पर मिलने वाली चट्टानों के बारे में जानकारी दी थी हालांकि अब 300 मीटर नीचे तक की जानकारी हासिल हुई है. चांद की सतह से 90 मीटर की गहराई पर पांच लेयर का अध्ययन किया गया है. हर एक लेयर की मोटाई अलग अलग है. खास बात यह है कि अधिक गहराई पर पाए जाने वाली लेयर की मोटाई अधिक है.
चांद पर ज्वालामुखी
चीनी टीम का मानना है कि चांद पर भी ज्वालामुखी थे. चीनी वैज्ञानिकों के मुताबिक चांद पर मारिया नाम का समंदर विशाल बेसाल्टिक प्लेन थे. करोड़ों साल पहले ज्वालामुखी से निकलने वाले लावा की वजह से चांद की सतह पर अलग अलग आकृतियों का निर्माण हुआ. वैज्ञानिकों का कहना है कि चांद की सतह पर चट्टानों की मोटाई में बदलाव इस तरफ इशारा करती है कि जैसे जैसे लावा का उद्गगार हुआ चट्टानों की मोटाई में परिवर्तन होता गया.
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