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प्रियांक खरगे
– फोटो : Social Media
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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे और उनकी सरकार में मंत्री उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए गए बयान के बाद सियासत गर्म हो गई है। कहने को तो कांग्रेस ने अपने इस बयान से पल्ला झाड़ लिया लेकिन कर्नाटक सरकार में मंत्री और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे प्रियांक खरगे ने उदयनिधि स्टालिन को एक तरह से समर्थन देकर सियासत को गर्म कर दिया है। खरगे ने कहा कि कोई भी धर्म जो समान अधिकार नहीं देता या इंसानों से इंसानों की तरह व्यवहार नहीं करता है, वह बीमारी की तरह है। फिलहाल प्रियांक के बयान के बाद अब भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस समेत INDIA गठबंधन को और घेरना शुरू कर दिया है।
क्या कांग्रेस के लिए मुसीबत हो गई है स्टालिन की दोस्ती
सियासी जानकारों का कहना है कि मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे ने जिस तरह से सनातन धर्म पर विवादित बयान दिया है वह कांग्रेस के लिए एक तरह से मुसीबत जैसी हो गई है। राजनीतिक जानकार और वरिष्ठ पत्रकार जीडी शुक्ला कहते हैं कि INDIA गठबंधन में डीएमके विपक्ष का एक अहम सहयोगी है। लेकिन जिस तरीके की सियासत तमिलनाडु में होती आई है और डीएमके उसके पक्ष में खड़ा रहा है वह कांग्रेस के लिए मुसीबत जैसी हो सकती है। उनका कहना है कि इस मामले में भी स्टालिन के बेटे ने विवादित बयान देकर कांग्रेस को मुसीबत में तो डाल ही दिया है। हालांकि कांग्रेस ने इस पूरे मामले में खुद को अलग करते हुए यह डीएमके का अपना निजी बयान बताया लेकिन इससे सियासत में उठा तूफान शांत नहीं हुआ। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस अपने स्टैंड पर कायम रहती उससे पहले ही पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बेटे और कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खरगे ने पूरी कर दी।
प्रियांक खरगे ने क्या दिया बयान?
दरअसल सोमवार को मीडिया से बात करते हुए प्रियांक खरगे ने कहा कि कोई भी धर्म, जो असमानता को बढ़ावा देता है और इंसान होने की गरिमा का हनन करता है तो वह धर्म नहीं है। खरगे ने कहा कि कोई भी धर्म जो समान अधिकार नहीं देता या इंसानों से इंसानों की तरह व्यवहार नहीं करता है वह बीमारी जैसा है। अब प्रियांक खरगे के बयान के बाद सियासत में एक बार फिर से तूफान खड़ा हो गया है। दरअसल डीएमके नेता उदयनिधि स्टालिन ने हाल ही में एक कार्यक्रम के दौरान अपने बयान में कहा कि कुछ ऐसी चीजें होती हैं, जिनका विरोध करना काफी नहीं होता, हमें उन्हें मिटाना ही होगा। मच्छर, डेंगू बुखार, मलेरिया, कोरोना, ये ऐसी चीजें हैं जिनका हम केवल विरोध नहीं कर सकते बल्कि हमें इन्हें मिटाना होगा। सनातन भी ऐसा ही है। उदयनिधि स्टालिन के इस बयान के बाद उनकी तीखी आलोचना शुरू हो गई।
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