Home World Tutankhamun Curse: मकबरा खोलने वालों को क्या तूतेनखामेन का लगता था शाप, हकीकत या सिर्फ शिगूफा

Tutankhamun Curse: मकबरा खोलने वालों को क्या तूतेनखामेन का लगता था शाप, हकीकत या सिर्फ शिगूफा

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Tutankhamun Curse: मकबरा खोलने वालों को क्या तूतेनखामेन का लगता था शाप, हकीकत या सिर्फ शिगूफा

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Tutankhamun Curse News:  तूतेनखामेन, मिस्र का राजा था लेकिन 1922 से पहले उसके बारे में जानकारी बेहद कम थी. मिस्र की किंग्स घाटी में स्थित मकबरे के बारे में जब दो ब्रिटिश पुरातत्वविदों ने जानकारी दी उसके बाद इस राजा की चर्चा होने लगी. चर्चा के पीछे दो वजह थी. पहली वजह यह कि तूतेनखामेन की कब्र में अकूत खजाना था और दूसरी वजह यह कि तूतनखामेन की मौत पर रहस्य गहराने लगा था. इन सबके बीच इस तरह की खबरें आने लगीं कि जिस किसी ने तूतनखामेन के मकबरे के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की वो उसके अभिशाप का शिकार बन गया.

क्या है शाप लगने की कहानी

अब सवाल यह है कि क्या वास्तव में जो कोई भी तूतेनखामेन के मकबरे में कुछ तलाशने की कोशिश करता था उसे शाप लग जाता था या जानबूझ कर किसी ने अफवाह फैलाने का काम किया था. इस बात के दावे किए जाते हैं जिस किसी ने भी मकबरे को खोलने की कोशिश की वो तूतनखामेन के शाप का शिकार बना. दरअसल इस धारणा को बल भी मिला क्योंकि जिन लोगों ने मकबरे को खोलने की कोशिश की थी उनकी मौत बहुत जल्द हो गई थी.जॉर्ज एडवर्ड स्टैनहोर मॉलिन्यूक्स हर्बर्ट की जो कार्नरवोन के पांचवें अर्ल थे उनकी मौत चर्चा के केंद्र में रही. दरअसल इन्होंने मकबरे की खोज और खुदाई के लिए आर्थिक मदद की थी. एडवर्ड की मौत 1922 में मकबरे के खोले जाने के महज एक साल बाद हो गई थी. उनकी मौत पर रहस्य आज भी कायम है हालांकि यह माना जाता है कि जब वो कायरो आए थे तो उनकी तबीयत पहले से ही खराब थी. वो मच्छर जनित रोग का शिकार हुए थे और उसमें मौत हुई थी.

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हकीकत से अधिक शिगूफा

तूतेनखामेन के मकबरे को खोलने में कई दर्जन लोग किसी न किसी तरह से जुड़े हुए थे. अगर अभिशाप को मान लिया जाए तो कई लोगों के मरने की आशंका अधिक थी. अन्वेषक जेम्स रैंडी अपनी किताब पुस्तक  एन इनसाइक्लोपीडिया ऑफ क्लेम्स, फ्रॉड्स एंड होक्सेज ऑफ द ऑकल्ट एंड सुपरनैचुरल में लिखते हैं कि जिन लोगों को अभिशाप झेलना चाहिए था, उनके जीवन की औसत अवधि 23 वर्ष से अधिक थी. सत्तावन साल बाद, 1980 में कार्नरवॉन की बेटी की मृत्यु हो गई. यही नहीं हॉवर्ड कार्टर जिन्होंने न केवल कब्र की खोज की बल्कि ताबूत से तूतनखामुन की ममी को भी हटा दिया था. उस घटना के सोलह साल बाद यानी 1939 तक जीवित रहे थे.

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