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INDIA alliance
– फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht
विस्तार
अगर सब कुछ तय योजना के मुताबिक ही चलता रहा तो विपक्षी दलों के गठबंधन समूह INDIA में सीटों का बंटवारा जल्द हो जाएगा। लेकिन जिस तरह के सियासी समीकरण बन रहे हैं, उससे टिकट बंटवारे पर आम सहमति पेचीदा भी होती जा रही है। सूत्रों के मुताबिक गठबंधन में हालात कुछ इस तरह के हो रहे हैं कि कुछ राज्यों में परिस्थितियां ‘फ्रेंडली फाइट’ की भी बनती जा रही हैं। यानी राष्ट्रीय स्तर पर पार्टियों का तो गठबंधन होगा, लेकिन कुछ राज्यों में संभवतया ये पार्टियां एक दूसरे के आमने-सामने भी आ सकती हैं। हालांकि विपक्षी दलों के बड़े नेता अभी ऐसे हालात में बीच का रास्ता तलाश कर जल्द से जल्द सीटों के बंटवारे पर आम सहमति बनाने की तैयारी कर रहे हैं।
विपक्षी दलों के गठबंधन समूह I.N.D.I.A में सबसे ज्यादा मशक्कत टिकट बंटवारे को लेकर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक कुछ राज्यों में तो टिकट बंटवारे का रास्ता बहुत आसान बना हुआ है, जबकि कई राज्यों में यह बड़ी समस्या भी बनता दिख रहा है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि जिन राज्यों में बगैर किसी मशक्कत के सीट बंटवारे की राह आसान नजर आ रही है, उसमें तमिलनाडु, झारखंड, पुडुचेरी समेत बिहार और महाराष्ट्र प्रमुखता से शामिल हैं। तमिलनाडु, पुडुचेरी और झारखंड राज्यों में लोकसभा की 54 सीटें आती हैं, इसमें 39 सीटें तो सिर्फ तमिलनाडु से ही हैं। यहां पर डीएमके, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों समेत कई छोटे दल पिछले लोकसभा चुनाव में भी सियासी मैदान में एक साथ थे और विधानसभा के चुनाव में भी एक साथ थे। राजनीतिक विश्लेषक एन. सुदर्शन कहते हैं कि इसलिए इस राज्य में गठबंधन को सीट बंटवारे में बहुत ज्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी। महाराष्ट्र और बिहार में भी गठबंधन की ही सरकारें आसानी से चली हैं। इसलिए इन राज्यों में भी दिक्कत नजर नहीं आ रही है।
सियासी जानकारों का कहना है कि तमिलनाडु की तरह ही पुडुचेरी और झारखंड में भी गठबंधन में शामिल दलों का पहले से ही सामंजस्य बना हुआ है। पुडुचेरी में जहां डीएमके और कांग्रेस का गठबंधन है, वहीं झारखंड में जेएमएम और राजद समेत कांग्रेस मिलकर सियासी मैदान में चुनाव लड़ते आए हैं। इसलिए यहां पर भी गठबंधन के सियासी दलों में टिकट बंटवारे को लेकर बहुत मशक्कत करने की जरूरत नजर नहीं आ रही है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि जिन राज्यों में गठबंधन में शामिल सियासी दल पहले से ही आपस में मिलकर चुनाव लड़ते आए हैं, उन राज्यों में परिस्थितियां अन्य राज्यों की तुलना में ज्यादा बेहतर और आसान नजर आ रही हैं। लेकिन कई राज्य ऐसे हैं, जिसमें गठबंधन में शामिल दल आपस में कांटे की टक्कर से सियासी लड़ाई लड़ते आए हैं। उन राज्यों में गठबंधन को सबसे ज्यादा टिकट बंटवारे पर मशक्कत करने की जरूरत लग रही है।
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