Home Breaking News UP Politics: क्या मायावती बदलेंगी अपनी सियासी चाल? घोसी उपचुनाव में उलटे पड़े दांव के बाद बन रही यह रणनीति

UP Politics: क्या मायावती बदलेंगी अपनी सियासी चाल? घोसी उपचुनाव में उलटे पड़े दांव के बाद बन रही यह रणनीति

0
UP Politics: क्या मायावती बदलेंगी अपनी सियासी चाल? घोसी उपचुनाव में उलटे पड़े दांव के बाद बन रही यह रणनीति

[ad_1]

UP Politics: Will Mayawati change her political tactics after backfired in Ghosi by election

Up Politics: Mayawati
– फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt

विस्तार


बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती अब अपनी सियासी रणनीति को बदलने की बड़ी योजना बना सकती हैं। योजना के मुताबिक पार्टी अब यह संभावना भी तलाशने की कोशिश कर रही है कि क्या लोकसभा चुनाव से पहले किसी बड़े सियासी गठजोड़ का हिस्सा बना जाए। दरअसल मायावती ने लोकसभा चुनाव से पहले किसी भी सियासी दल से गठबंधन के लिए हामी ही नहीं भरी है। सियासी जानकारों का मानना है कि जिस तरीके से घोसी उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने वोट न देने का दांव खेला था, वह पूरी तरीके से फ्लॉप हो गया। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि मायावती को अब अपने कोर वोट बैंक में भी उनकी पार्टी के लिए भरोसे का सबसे बड़ा संकट पैदा हो गया है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि बसपा अमूमन उपचुनाव से हमेशा से दूर रही है। लेकिन कई बार उसने उपचुनाव में अपनी किस्मत भी आजमाई। इस बार उत्तर प्रदेश के घोसी में हुए उपचुनाव में बहुजन समाज पार्टी ने चुनाव लड़ना तो दूर की बात, बल्कि अपने मतदाताओं को वोट न देने की भी अपील कर डाली। राजनीतिक विश्लेषक हरिओम तंवर कहते हैं कि चुनावी साल में बसपा ने जिस तरीके से उपचुनाव न लड़ने के साथ-साथ मतदाताओं को वोट न देने की अपील की, वह बहुजन समाज पार्टी के लिए बैकफायर कर गया। उनका कहना है कि जो चुनाव आने वाले लोकसभा चुनावों में एक तरह का परसेप्शन बनाने वाला था, उसमें ही बहुजन समाज पार्टी को सबसे बड़ा झटका लगा है। तंवर कहते हैं कि और उनकी पार्टी के रणनीतिकारों ने ऐसा फैसला क्यों लिया यह तो वही बेहतर बता सकेंगे, लेकिन उसके दूरगामी परिणाम फिलहाल बहुजन समाज पार्टी के लिए बिल्कुल सकारात्मक नजर नहीं आ रहे हैं।

वहीं बहुजन समाज पार्टी ने भी घोसी उपचुनाव से पहले अपनी तैयार की गई रणनीति पर एक बार फिर से विचार करने की तैयारी शुरू कर ली है। सूत्रों का कहना है कि पार्टी से जुड़े प्रमुख नेता अब बसपा सुप्रीमो मायावती से मिलकर घोसी उप चुनाव में मिले वोटों पर मंथन करने के साथ-साथ नई रणनीति बनाने की गुजारिश करने की बात कर रहे हैं। पार्टी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि पार्टी ज्यादातर उपचुनाव नहीं लड़ती है, लेकिन दबी जुबान में कुछ नेता इस बात को स्वीकार करते हैं कि जब लोकसभा चुनाव से पहले घोसी के उपचुनाव की इतनी अहमियत थी, तो पार्टी को इतना बड़ा रिस्क नहीं लेना चाहिए था। इस फैसले से अंदरूनी तौर पर नाराज कुछ नेता कहते हैं कि अब पार्टी के लिए सबसे बड़ा संकट अपने वोटर के बीच में भरोसे का हो गया है। राजनीतिक जानकार भी मानते हैं कि बहुजन समाज पार्टी के वोटरों के बीच में यह संदेश जाना बेहद जरूरी था कि बहुजन समाज पार्टी घोसी के उपचुनाव में मैदान में है। उसका परिणाम चाहे पार्टी के पक्ष में आता है या विपक्ष में।






[ad_2]

Source link

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here