Home Breaking News ‘तुम बिन’ का ये गाना जगजीत सिंह ने आठ बार गाया, ‘बेवफा सनम’ ने बदल दी हमारी किस्मत

‘तुम बिन’ का ये गाना जगजीत सिंह ने आठ बार गाया, ‘बेवफा सनम’ ने बदल दी हमारी किस्मत

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‘तुम बिन’ का ये गाना जगजीत सिंह ने आठ बार गाया, ‘बेवफा सनम’ ने बदल दी हमारी किस्मत

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निर्देशक चंद्रा बारोट का नाम नई पीढ़ी के लोग भले न जानते हों लेकिन मशहूर निर्माता निर्देशक मनोज कुमार के सहायक रहे चंद्रा बारोट ही वह निर्देशक हैं जिन्होंने उस समय के एंग्री यंग मैन अमिताभ बच्चन को लेकर बनाई थी फिल्म ‘डॉन’! और, इन्हीं चंद्रा बारोट को श्रेय जाता है हिंदी सिनेमा को एक नई संगीतकार जोड़ी से परिचित कराने का। ये जोड़ी है निखिल कमाथ और विनय तिवारी को जो गायिका अनुराधा पौडवाल का साथ पाकर बने हिंदी सिने संगीत की चर्चित संगीतकार जोड़ी, निखिल-विनय। इस जोड़ी के निखिल कामथ से ‘अमर उजाला’ संवाददाता वीरेंद्र मिश्र ने ये एक्सक्लूसिव बातचीत की।



शुरू से शुरू करते हैं, आपकी जोड़ी कैसे बनी?

हमने निर्माताद्वय सुशील गजवानी और शशि गजवानी के दूरदर्शन के लिए बने एक सीरियल ‘जॉकी’ के लिए संगीत दिया था। इससे पहले हमारी और विनय तिवारी की जोड़ी नहीं बनी थी। विनय तिवारी के पिताजी मेरी बहन को संगीत सिखाते थे। जब मैंने इस सीरियल  के लिए शीर्षक गीत रिकॉर्ड किया, तो  विनय को भी बुला लिया। इस तरह से हमने पहली बार इस सीरियल में साथ काम किया। फिर इन्हीं निर्माताओं ने एक फिल्म ‘दूसरा घर’ का भी निर्माण किया। फिल्म तो रिलीज नहीं हो सकी लेकिन इसी फिल्म के लिए हमने एक गाना अनुराधा पौडवाल जी से गवाया था। यहीं से अनुराधा जी का आशीर्वाद हमारे साथ हुआ।


फिर आगे..?

अनुराधा ने गाने की रिकॉर्डिंग के बाद हमें टी सीरीज के ऑफिस बुलाया और वहां हमारी मुलाकात गुलशन कुमार जी से हुई। मुझे बिल्कुल उम्मीद नहीं थी कि गुलशन जी से हमारी मुलाकात इतनी आसानी से हो जाएगी। मेरे पास 10-15 गाने थे जिन्हें मैंने कॉलेज के समय बनाया था। पांच गाने उन्हें बहुत अच्छे लगे। इनका चयन करने के बाद मुझे और गाने बनाने का उन्होंने निर्देश दिया। वह मेरे लिए ऐसा क्षण था कि जैसे मेरा एक सपना पूरा हो गया हो। मैंने विनय से कहा कि आप मेरे लिए लकी साबित हुए हैं। अब हमेशा के लिए जुड़ जाओ। फिर हमने टी सीरीज के लिए गाने रिकॉर्ड करने शुरू कर दिए। ‘चोर और चांद’ और ‘प्यार भरा दिल’ में इस्तेमाल हुए हमारे गाने लोगों को पसंद आए। ‘प्यार भरा दिल’ का तो संगीत ही बहुत हिट हुआ और हमारी गाड़ी चल पड़ी। अनुराधा जी को मैं आज भी अपनी गॉडमदर मानता हूं।


और, अपने करियर का असली टर्निंग प्वाइंट किस फिल्म को मानते हैं?

ये थी फिल्म ‘बेवफा सनम’ जिसके पहले ही दिन पांच लाख कैसेट बिक गए थे। पहले एक लाख एक कैसेट इसके बने थे लेकिन जब शाम चार बजे तक ही सारे कैसेट बिक गए तो  गुलशन जी ने  फैक्ट्री में सारे काम बंद करवाकर सिर्फ ‘बेवफा सनम’ के ही कैसेट तैयार करवाए।

 


इस फिल्म के गाने हिट कराने के लिए बनी मार्केटिंग स्ट्रेटजी को आज भी हिंदी सिनेमा का सबसे बड़ा गिमिक माना जाता है..

हां, हमें भी पता चला था कि बाजार में इस बात का हल्ला है कि ये गाने एक पाकिस्तानी गायक ने फांसी की सजा पाने स पहले लिखे थे। उससे पहले हम अताउल्लाह खान के गानों का एक अलबम ‘बेवफाई’ के नाम से तैयार कर चुके थे। लेकिन हमने इसमें अपने नाम संगीतकार के तौर पर देकर लिखा, म्यूजिक अरेंज्ड बाय निखिल-विनय। मैंने कभी उन गानों को क्रेडिट नहीं लिया। उस अल्बम में ये भी लिखा हुआ है, हिट्स ऑफ अताउल्लाह खान। ‘बेवफा सनम’ में संगीतकार के तौर पर हमारा नाम है। मेरा मानना है कि अताउल्ला खान को लेकर तब जो कहानी फैलाई गई वह वह मार्केटिंग का फंडा रहा होगा। यह कहानी मुझे भी पता चली थी। लेकिन बाद में मुझे पता चला कि वह सच नहीं था। अताउल्लाह खान खान साहब अब भी जीवित हैं।

 


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