Home Breaking News खबरों के खिलाड़ी: इस खिड़की से सशक्तीकरण की राह खुलेगी, नारी शक्ति वंदन विधेयक पर विश्लेषकों का विश्लेषण

खबरों के खिलाड़ी: इस खिड़की से सशक्तीकरण की राह खुलेगी, नारी शक्ति वंदन विधेयक पर विश्लेषकों का विश्लेषण

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खबरों के खिलाड़ी: इस खिड़की से सशक्तीकरण की राह खुलेगी, नारी शक्ति वंदन विधेयक पर विश्लेषकों का विश्लेषण

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Khabron Ke Khiladi analysis on Nari Shakti Vandan Bill BJP Congress

खबरों के खिलाड़ी।
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


बीता हफ्ता भारतीय लोकतंत्र के लिए ऐतिहासिक रहा। महिलाओं को लोकसभा और राज्यों की विधानसभा में 33 फीसदी आरक्षण देने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। नारी शक्ति वंदन अधिनियम नाम का यह विधेयक दोनों सदनों में सर्वसम्मति से पारित हो गया। इसके साथ ही देश के नए संसद भवन में कार्यवाही की शुरुआत हुई। संसद के पुराने भवन को संविधान भवन के रूप में नई पहचान मिली। इन सबके बीच सबसे ज्यादा चर्चा महिला आरक्षण के लिए लाए गए विधेयक की ही रही। इसी मुद्दे पर चर्चा के लिए खबरों के खिलाड़ी की इस नई कड़ी में हमारे साथ वरिष्ठ विश्लेषक समीर चौगांवकर, राखी बख्शी, प्रेम कुमार, गुंजा कपूर और अवधेश कुमार मौजूद रहे। आइए जानते हैं विश्लेषकों की राय…

गुंजा कपूर

मैं उस भारत में बड़ी हुई हूं, जहां मैंने महिलाओं को सशक्त होते देखा है। ये वो भारत है, जहां परिवारों ने अपने बेटियों को पढ़ाया भी है और बढ़ाया है। मुझे लगता है कि यह आरक्षण शायद थोड़ा देर से लाया गया है। आप देखिए इंदिरा गांधी, जिन्हें उनकी पार्टी ने गूंगी गुड़िया के तौर पर आगे किया, लेकिन वे ऐसी महिला प्रधानमंत्री हुईं, जिन्होंने वो कर दिखाया, जो कोई पुरुष प्रधानमंत्री नहीं कर पाया। उन्होंने ही पाकिस्तान के दो टुकड़े किए। 

बीजद पार्टी अपनी 42 फीसदी महिलाओं को संसद भेजती है। दूसरी पार्टियां ऐसा क्यों नहीं कर पाती हैं? यूपी की एक मंत्री हैं गुलाब देवी, जो 1980 के दशक में भारत की राजनीति आईं। आज उनकी बेटियां न सिर्फ पढ़ीं लिखीं हैं, बल्कि अपने-अपने क्षेत्रों में बेहद सफल हैं। उदाहरण ही अपने आप में सबकुछ कहते हैं। मेरा मानना है कि आरक्षण देने से मेरा भला नहीं होगा। मेरा भला तब होगा, जब विशाखा गाइडलाइन को अच्छी तरह से लागू किया जाए। मेरा भला तब होगा, जब महिलाओं पर अश्लील टिप्पणियां करने वालों पर रोक लग सके। महिलाएं पिछले नौ साल में लाभार्थी बन गई हैं। वो वोट बैंक नहीं रह गईं। ये बड़ा बदलाव आया है। 






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