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What is Khalistan Movement: भारत और कनाडा के संबंध तनावपूर्ण बने हुए हैं. खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या के पीछे कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने भारत का हाथ होने का आरोप लगाया है. बेबुनियाद ठहराते हुए कनाडा के इस आरोप का भारत ने करारा जवाब दिया है. इस बीच कनाडा सरकार में पूर्व मंत्री रहे उज्ज्वल दोसांझ ने विभिन्न मुद्दों पर बात की. उन्होंने कहा कि भारत और कनाडा के बीच रिश्तों में भरोसा बहुत कम है. वजह है कि कनाडा एक ऐसे संगठन का समर्थन करता है, जो एक मित्र देश के टुकड़े करने की बात कहता हो.
दोसांझ 2004-2011 तक लिबरल पार्टी के संसद सदस्य और ब्रिटिश कोलंबिया के प्रमुख रह चुके हैं. ट्रूडो भी लिबरल पार्टी के अध्यक्ष हैं. वह 2004-2006 तक कनाडा के हेल्थ मिनिस्टर भी रह चुके हैं.

एक इंटरव्यू में जब उनसे सवाल किया गया कि क्या कनाडा में चल रहा खालिस्तान आंदोलन भारत तक फैल जाएगा? इसके जवाब में उन्होंने कहा, खालिस्तनी आंदोलन कनाडा तक ही सिमट कर रह जाएगा. भारत के पंजाब रहने वाले गैर-सिखों के साथ भी रहते हैं. उनके साथ पढ़ाई और काम करते हैं. वहां इंटरकास्ट मैरिज भी करते हैं. 1984 में जो गुस्सा था, वह अब खत्म हो चुका है. जो भी लोग भारत सरकार के विरुद्ध या फिर भारत के खिलाफ आहत महसूस करते हैं, उनके लिए कनाडा में कुछ नहीं है. वे बाकी समुदाय के लोगों के साथ नहीं रहते हैं. वे अपने हिंदू मंदिरों में जाते हैं. सिख अपने गुरुद्वारों में जाते हैं. सिखों और हिंदुओं के बीच वार्ता बहुत कम होती है. सिर्फ शादी या किसी अन्य समारोह में. लोगों को यह मालूम ही नहीं है कि वे हमारे ही जैसे हैं, वे दुश्मन नहीं हैं. उन्होंने हमें नुकसान भी नहीं पहुंचाया है.
यह पूछने पर कि कनाडा में सिखों का प्रभाव बाकी समुदायों की तुलना में ज्यादा क्यों है? इस पर उन्होंने कहा कि बाकियों की तुलना में ट्रूडो पर उनका प्रभाव अधिक है. लेकिन उनके बाद खालिस्तानियों का ऐसा असर नहीं दिखेगा. सिख समुदाय का कनाडा में इतना अधिक प्रभाव है, यह कमाल की बात है. लेकिन खालिस्तानियों का प्रभाव चिंता का विषय है.
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