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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : iStock
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भारत की 12 अंकों की सार्वभौमिक पहचान आधार पर चिंता जताते हुए वैश्विक रेटिंग कंपनी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने बायोमेट्रिक प्रौद्योगिकियों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाया है। हालांकि अब सरकार ने इन दावों को खारिज कर दिया है। सरकार की ओर से सोमवार देर रात एक बयान में कहा गया, ‘एक निश्चित निवेशक सेवा ने बिना किसी सबूत या आधार का हवाला दिए बिना दुनिया की सबसे भरोसेमंद डिजिटल आईडी आधार के खिलाफ व्यापक दावे किए हैं।
इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि आधार दुनिया में सबसे भरोसेमंद डिजिटल आईडी है और इस पर मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस की राय आधारहीन है। पिछले एक दशक में, एक अरब से अधिक भारतीयों ने 100 बिलियन से अधिक बार खुद को प्रमाणित करने के लिए आधार का उपयोग करके इसमें अपना विश्वास व्यक्त किया है। किसी पहचान प्रणाली में विश्वास के ऐसे अभूतपूर्व मत को नजरअंदाज करने का मतलब यह है कि उपयोगकर्ता यह नहीं समझते हैं कि उनके हित में क्या है। इसमें यह भी कहा गया है कि निवेश कंपनी ने अपने दावे के समर्थन में किसी प्रकार का आंकड़ा या तथ्य नहीं दिया है।
सरकार की ओर से मूडीज को जवाब देने के लिए जारी बयान
मूडीज ने कहा है कि भारत में आधार प्रणाली को बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है। इनमें प्राधिकरण स्थापित करने का बोझ और बायोमेट्रिक विश्वसनीयता साबित करने जैसी चिंताएं शामिल हैं। मूडीज ने अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘इस प्रणाली में अक्सर सेवा से इनकार कर दिया जाता है, गर्म, आर्द्र जलवायु में बायोमेट्रिक प्रौद्योगिकियों की विश्वसनीयता, विशेष रूप से मैनुअल मजदूरों के लिए संदिग्ध है।’
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