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सुदिप्ती हाजेला
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
एशियाई खेल 2023 में भारतीय एथलीटों से काफी उम्मीदें थीं। भारतीय खेल मंत्री ने खिलाड़ियों को विदा करते हुए अबकी बार 100 पार का नारा दिया था। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक शानदार प्रदर्शन किया है और उम्मीदों पर खरे उतरे हैं। इस बीच भारत की घुड़सवारी टीम ने उम्मीद से कहीं ज्यादा बेहतर प्रदर्शन किया है। अनुश अगरवाला, छेदा, दिव्यकृति सिंह और सुदिप्ती हाजेला ने मिलकर भारत को 41 साल के बाद ड्रेसेज टीम स्पर्धा का स्वर्ण पदक दिलाया। इसके बाद अनुश ने व्यक्तिगत स्पर्धा में भी पदक जीता। देश को ऐतिहासिक स्वर्ण दिलाने वाली टीम का हिस्सा रहीं सुदिप्ती से अमर उजाला ने बात की और उन्होंने इस पदक के पीछे का संघर्ष बयां किया। पढ़िए इस बातचीत के खास अंश…
सवालः आपको यह पदक जीतने के लिए कितना संघर्ष करना पड़ा?
जवाबः मैं कहूंगी संघर्ष की लिस्ट तो काफी लंबी है। लेकिन यही है की इतनी कुछ भी छोटी बड़ी चीज करने के लिए काफी कठिनाइयां और चुनौतियां आती हैं। लेकिन ये है कि मैं पिछले 10 से 12 साल से राइडिंग कर रही हूं और पांच छह सालों से बाहर रह रही हूं तो ये काफी बड़ा संघर्ष था कि घर से दूर रहना और मैंने राइडिंग करना काफी कम उम्र में ही शुरू कर दिया था। तो घर से दूर रहना और पिछले दो साल से मैं यूरोप में ही रह रही हूं और एक नॉर्मल लाइफ से अलग हटके आपका जीवन जीना स्पोर्ट्समैन की तरह, वो भी अपने आप में काफी ही कठिनाई भरा होता है। आप कभी सोचते हैं की मैं ये नहीं कर पा रही हूं वो नहीं कर पा रही हूं और एक सामान्य टीनएज लाइफ नहीं थी मेरी। स्कूल में भी यहां और कॉलेज में भी। लेकिन सब कुछ वो सारे जितने संघर्ष होते हैं। वो इस एक चीज के लिए होते हैं और यह मेडल मैं कहूंगी सिर्फ मैंने नहीं है। भारत ने जीता है। तो अगर भारत के लिए इतना संघर्ष करना पड़े तो थोड़ा क्या मैं पूरी जिंदगी इसमें लगा सकती हूं।
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