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आधुनिक क्रिकेट में रिकॉर्ड्स का बनना और उनका टूटना कोई बड़ी बात नहीं रह गई है. अगर बात भारतीय क्रिकेट की करें तो पूर्व क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, महेंद्र सिंह धोनी और विराट कोहली के नाम कई रिकॉर्ड्स हैं. लेकिन, इन खिलाड़ियों के रिकॉर्ड्स बनने के साथ ही उसे तोड़ने के लिए कोई दूसरा क्रिकेटर पैदा हो जाता है. हम सचिन तेंदुलकर की ही बात करते हैं. सचिन के नाम इस वक्त अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा शतक लगाने का रिकॉर्ड है. वनडे क्रिकेट में सचिन ने 49 शतक लगाए हैं. लेकिन, अब इस रिकॉर्ड पर खतरा पैदा हो गया है. सचिन के दौर में ही इंटरनेशनल क्रिकेट में कदम रखने वाले धुरंधर खिलाड़ी विराट कोहली उनके पीछे पड़े हैं. विराट कोहली 281 वनडे मैच खेलकर 47 शतक लगा चुके हैं. अगर उनके बल्ले ने साथ दिया तो उम्मीद की जा रही है कि इस वर्ल्ड कप के दौरान वह सचिन का रिकॉर्ड तोड़ देंगे. गुरुवार यानी 5 अक्टूबर से वनडे वर्ल्डकप की शुरुआत हो रही है. इसी तरह टीम इंडिया के कप्तान रोहित शर्मा हैं. वह भी वनडे मैचों में अब तक 30 शतक लगा चुके हैं.
दरअसल, मौजूदा क्रिकेट का जो स्वरूप है उसमें रिकॉर्ड के बनने और टूटने का पूरा पैटर्न बदल गया है. आज का क्रिकेट बेहद आक्रामक हो गया है. बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक का पूरा पैटर्न बदल गया है. लेकिन, इन सभी बदलावों के बीच हम आपके साथ आज एक ऐसे रिकॉर्ड की चर्चा करने जा रहे हैं जिसका टूटना असंभव सा लगता है. यह रिकॉर्ड किसी बल्लेबाज के नाम हैं. बल्कि इसे बनाया है भारत के एक महान स्पिन गेंदबाज ने. यह रिकॉर्ड क्रिकेट के जनक देश इंग्लैंड के खिलाफ एक स्पिन गेंदबाज द्वारा लगातार 131 डॉट गेंद डालने का.
इस गेंदबाज ने उस टेस्ट मैच में अपनी पारी के दौरान लगातार 21 ओवर मैडेन डाले थे. हालांकि इस मैच में उन्हें कोई विकेट नहीं मिला था. इस खिलाड़ी का नाम है रमेशचंद्र गंगाराम ‘बापू’ नाडकर्णी. इन्हें ‘बापू’ नाडकर्णी के नाम से जाना जाता है. नाडकर्णी का जन्म 4 अप्रैल 1933 को नाशिक में हुआ था. वह अपने दौर के एक बेहतरीन स्पिन गेंदबाज थे. दुनिया के किसी भी बल्लेबाज के लिए उनकी गेंदों पर रन बनाना बेहद मुश्किल काम था. उनकी पहचान ही यही थी. वह आज तक दुनिया के सबसे कंजूस गेंदबाज जाने जाते हैं. उनके पूरे करियर में इकनॉमी रेट 1.6 रन रही. नाडकर्णी अपनी गेंदबाजी के बारे में बताते थे कि वह प्रेक्टिस के दौरान पिच पर एक सिक्का रखते थे और उसी सिक्के पास उनकी हर एक गेंद टप्पा खाती थी.
नाडकर्णी के नाम दुनिया का एक सबसे बड़ा रिकॉर्ड है. उन्होंने यह रिकॉर्ड 12 जनवरी 1964 को बनाया था. तत्कालीन मद्रास (मौजूदा चेन्नई) में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच चल रहा था. उस मैच में नाडकर्णी ने लगातार 131 गेंदें डॉट डाली थी. उनका यह रिकॉर्ड आज तक नहीं टूटा. नाडकर्णी ने 1955 से 1968 के बीच कुल 41 टेस्ट मैच खेले. इस दौरान उन्होंने एक शतक के साथ कुल 1414 रन बनाए. उन्होंने 88 विकेट भी चटकाए. उनका बेस्ट बॉलिंग रिकॉर्ड 43 रन देकर छह विकेट झटकने का था.
तीन साल पहले निधन
इस महान खिलाड़ी का 18 जनवरी 2020 को 86 साल की उम्र में निधन हो गया. मगर, 12 जनवरी 1964 की अपनी गेंदबाजी की वजह से वह दुनिया के क्रिकेट में अमर हो गए. उस वक्त दुनिया में टेस्ट क्रिकेट काफी लोकप्रिय हुआ करता था. उस वक्त तक अंतरराष्ट्रीय वनडे मैचों की शुरुआत भी नहीं हुई थी. दुनिया के क्रिकेट इतिहास में पहला वनडे मैच 5 जनवरी 1971 को मेलबर्न में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड के बीच खेला गया था.
क्रिकेट में समय के साथ हो रहे बदलावों को देखते हुए ऐसा लगता है कि नाडकर्णी का ये रिकॉर्ड टूटना नामुमकिन है. न तो अब किसी गेंदबाज का इतना लंबा बॉलिंग स्पेल होता है और न ही अब टेस्ट क्रिकेट का वह रूतबा बचा है. क्रिकेट में आने वाला समय वनडे और टी20 मैचों का है. इन मैचों में तो किसी गेंदबाज को अधिकतम 4 से 10 ओवर की गेंदबाजी ही मिलती है. ऐसे में क्रिकेट के रिकॉर्डवीर कहलाने वाली सचिन तेंदुलकर, विराट कोहली या महेंद्र सिंह धोनी के जैसे भविष्य के क्रिकेटर भी नाडकर्णी का रिकॉर्ड नहीं तोड़ पाएंगे.
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Tags: Cricket
FIRST PUBLISHED : October 4, 2023, 18:00 IST
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