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आमतौर लीजेंड शब्द का प्रयोग किसी व्यक्ति की लोकप्रियता को ध्यान में रखकर किया जाता है। भारतीय सिनेमा के अभिनेता अनुपम खेर बहुत लोकप्रिय सितारे हैं। उनको लिविंग लीजेंड माना जाता है। लेकिन अनुपम खेर की कोई तारीफ करें, या उनको लीजेंड कहे। यह बात उनको सुनना कतई पसंद नहीं है। यहां तक कि अभिनेता को धन्यवाद जैसे शब्द भी नहीं पसंद हैं।
भारतीय सिनेमा में अभिनेता अनुपम खेर का जो योगदान रहा है। उसे बिल्कुल भी बुलाया नहीं जा सकता है। उन्होंने अपने फिल्मी करियर में एक से बढ़कर एक यादगार किरदार निभाए हैं। और, अभी भी फिल्मों में अच्छे खासे व्यस्त हैं। भारतीय सिनेमा ने उनके योगदान और उनकी लोकप्रियता को देखते हुए उन्हें लिविंग लीजेंड माना जाता है। लेकिन जब कोई उन्हें लीजेंड कह कर संबोधित करता है, तो यह बात सुनकर उन्हें चिढ़ हो जाती है।
अभिनेता अनुपम खेर अब 500 फिल्मों में काम कर चुके है। और, अभी भी उनके अंदर एक कुछ ना कुछ नया सीखने की ललक रहती है। वह कहते हैं, ‘मैंने 500 फिल्में कर ली हैं। मुझे कोई क्या सिखाएगा ? लेकिन जब मैं नई निर्देशकों के साथ काम करता हूं ,तो उनसे बहुत कुछ सीखने को मिलता है। ‘टाइगर नागेश्वर राव’ की शूटिंग के दौरान मुझे बहुत कुछ सीखने का मौका मिला। मुझे नए लोगों के साथ काम करके हमेशा अच्छा लगता है।’
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