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Central Secretariat Service
– फोटो : Amar Ujala/ Himanshu Bhatt
विस्तार
केंद्र सरकार की ‘रीढ़’ कही जाने वाली केंद्रीय सचिवालय सेवा ‘सीएसएस’ के हजारों अधिकारी चौथे कैडर रिव्यू का इंतजार कर रहे हैं। पिछले साल अक्तूबर में सीएसएस के चौथे कैडर रिव्यू के लिए एक कमेटी गठित की गई थी। सीएसएस फोरम (केंद्रीय सचिवालय सेवा के अधिकारियों की एसोसिएशन) ने जनवरी में ही अपने सुझाव कमेटी को दे दिए थे। इसके बावजूद अभी तक कैडर रिव्यू नहीं हो सका। नतीजा, सीएसएस में विभिन्न स्तरों पर अधिकारियों की पदोन्नति में देरी हो रही है। अंडर सेक्रेटरी को डिप्टी सेक्रेटरी पहुंचने में 13 साल लग रहे हैं। अगर अब कैडर रिव्यू नहीं होता है, तो बहुत से अंडर सेक्रेटरी बिना डायरेक्टर बने ही रिटायर हो जाएंगे। सीएसएस फोरम की मांग है कि अविलंब कैडर रिव्यू किया जाए। संभव है कि इसके बाद केंद्र सरकार चुनाव में व्यस्त हो।
जनवरी में ही दे दिए थे सुझाव
सीएसएस फोरम के महासचिव, आशुतोष मिश्रा ने बताया, पिछले साल अक्तूबर में सीएसएस के चौथे कैडर रिव्यू के लिए कमेटी गठित की गई थी। इसमें डीओपीटी के एस्टेब्लिशमेंट अधिकारी एवं अतिरिक्त सचिव को कमेटी का चेयरमैन बनाया गया था। डीओपीटी के ज्वाइंट सेक्रेटरी ‘सीएस’ तथा व्यय विभाग के ज्वाइंट सेक्रेटरी ‘पर्स’, इस कमेटी के सदस्य और डीओपीटी के डिप्टी सेक्रेटरी ‘सीएस1’ को मैंबर सेक्रेटरी बनाया गया। इसके बाद कमेटी ने सीएसएस फोरम से सुझाव मांगे थे। फोरम के पदाधिकारियों ने कमेटी को जनवरी में ही अपना प्रतिवेदन सौंप दिया था। इतना ही नहीं, फोरम ने डीओपीटी मंत्री और दूसरे शीर्ष अधिकारियों को समय-समय पर जल्द कैडर रिव्यू कराने का आग्रह भी किया है। इन सबके बाद भी कमेटी की रिपोर्ट नहीं आई। हर मोर्चे पर सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाले लगभग 12000 सीएसएस अधिकारी अब अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
26 साल की सेवा के बाद नहीं बन सके डायरेक्टर
मौजूदा समय में लगभग 1200 अंडर सेक्रेटरी ऐसे हैं, जो डिप्टी सेक्रेटरी बनने की सभी योग्यताएं पूरी करते हैं। इतनी बड़ी संख्या में ये अधिकारी लंबे समय से पदोन्नति का इंतजार कर रहे हैं। इसी तरह से 100 डिप्टी सेक्रेटरी ऐसे हैं, जिन्होंने डायरेक्टर बनने के सभी पड़ाव पार कर लिए हैं। खास बात है कि ये सभी अधिकारी 1997 से राजपत्रित ओहदे पर कार्यरत हैं। डीओपीटी के नियमानुसार, इन्हें 18 साल की सेवा के बाद ही डायरेक्टर बन जाना चाहिए थे, लेकिन 26 साल की सेवा के बाद भी इन्हें अभी तक वह पद नहीं मिल सका है। ऐसे ही कई अधिकारी रिटायर हो चुके हैं। दूसरे पदों पर भी कुछ ऐसा ही हाल है। सीएसएस फोरम द्वारा लंबे समय तक किए गए आंदोलन के बाद इस साल ‘एएसओ’ को सेक्शन अफसर की पदोन्नति मिली थी। जून में डीओपीटी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह की घोषणा के बाद सीएसएस के करीब 1600 ‘एएसओ’ को अनुभाग अधिकारी यानी ‘एसओ’ की एडहॉक पदोन्नति दी गई थी। सीएसएस फोरम को इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से गुहार लगानी पड़ी थी। सैंकड़ों सीएसएस अधिकारियों ने नॉर्थ ब्लॉक के भीतर और बाहर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया था।
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