Home World ट्रूडो ने अगर नहीं छोड़ा खालिस्तान प्रेम तो कनाडा को चुकानी होगी भारी कीमत, अर्थव्यवस्था को होगा इतने अरब का नुकसान

ट्रूडो ने अगर नहीं छोड़ा खालिस्तान प्रेम तो कनाडा को चुकानी होगी भारी कीमत, अर्थव्यवस्था को होगा इतने अरब का नुकसान

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ट्रूडो ने अगर नहीं छोड़ा खालिस्तान प्रेम तो कनाडा को चुकानी होगी भारी कीमत, अर्थव्यवस्था को होगा इतने अरब का नुकसान

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Canada Economy: कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो अपने देश में खालिस्तानियों को खूब बढ़ावा दे रहे हैं. खालिस्तानी आतंकी हरदीप सिंह निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप लगा कर ट्रूडो ने भारत-कनाडा संबंधों का भारी नुकसान पहुंचाया है. शायद उन्हें यह अंदाजा नहीं होगा कि भारत उनके आरोप पर इतनी सख्त प्रतिक्रिया देगा. विदेशी ही नहीं देशी मामलों में भी ट्रूडो लगातार घिरते जा रहे हैं. उनकी लोकप्रियता कम हो रही है और उनके लाख दावों के बावजूद कनाडा की अर्थव्यस्था कोई कमाल नहीं दिखा पा रही है. भारत से संबंध बिगाड़ कर उन्होंने कनाडा इकॉनमी के लिए एक बड़े संकट को दावत दे दी है.

मीडिया रिपोट्स में दावा किया है कि अगर कनाडा जाकर पढ़ाने करने वाले भारतीय छात्रों में 5 फीसदी की भी गिरावट आ गई तो कनाडाई अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान झेलना होगा. दरअसल भारतीय छात्र कनाडा की इकॉनमी में सालाना करीब 68,000 करोड़ रुपये (8 अरब डॉलर) डालते है. ट्रूडो के आरोपों के बाद जब से भारत-कनाडा के संबंधों में दरार आई है भारतीय छात्र कनाडा छोड़ने लगे हैं.

कनाडा में बड़ी संख्या में भारतीय छात्रों के जाने की वजह
कनाडा में हर साल करीब 2 लाख भारतीय छात्र पढ़ने जाते हैं. इसकी बढ़ी वजह यह है कि वहां पढ़ाई के साथ-साथ वर्क परमिट भी मिल जाता है जिसके चलते ये अपना खर्चा आसानी से निकाल लेते हैं. मीडिया रिपोट्स के मुताबिक एक्सपर्ट्स बताते हैं कि कनाडाई यूनिवर्सिटी में एक साल में तीन बार जनवरी, मई और सितंबर में छात्रों का दाखिला होता है.

कनाडाई अर्थव्यवस्था को लग सकता है बड़ा झटका
हालांकि अब इस विवाद की छाया भारतीय छात्र कनाडा जाने के सवाल पर असमंजस की स्थिति में है. कोई नहीं जानता कि यह विवाद कितना लंबा चलेगा. मीडिया रिपोट्स के मुताबिक जनवरी में होने वाले दाखिले में भारतीय छात्रों की संख्या में सिर्फ 5 फीसदी की भी गिरावट आने से कनाडाई अर्थव्यस्था को 727 मिलियन डॉलर (60,42,82,40,000.00 INR) का झटका लगेगा। कनाडा के शिक्षण संस्थान इस खतरे को भांप गए हैं और वे भारतीय छात्रों को तरह-तरह के ऑफर देकर लुभाने में जुटे हैं.

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