Home World Al Aqsa Mosque: 2 एकड़ की वो जगह, जिसके पीछे मुसलमान-यहूदी करते हैं खून-खराबा; अल-अक्सा मस्जिद की पूरी कहानी

Al Aqsa Mosque: 2 एकड़ की वो जगह, जिसके पीछे मुसलमान-यहूदी करते हैं खून-खराबा; अल-अक्सा मस्जिद की पूरी कहानी

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Al Aqsa Mosque: 2 एकड़ की वो जगह, जिसके पीछे मुसलमान-यहूदी करते हैं खून-खराबा; अल-अक्सा मस्जिद की पूरी कहानी

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Al-Aqsa Mosque Attack: हमास ने शनिवार को चौंकाते हुए इजराइल पर जमीन, हवा और समुद्र से हमला कर दिया, जिसमें 26 सैनिकों समेत 350 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और 1500 घायल हो गए. मृतकों का आंकड़ा लगातार बढ़ रहा है. हमास ने इजरायल की कई महिलाओं और सैनिकों को बंधक बना लिया है. जबकि गाजा में 250 से ज्यादा लोग काल के गाल में समा गए हैं. इजरायल की महिलाओं से हमास के आतंकियों की बदसलूकी करने के वीडियोज भी वायरल हुए हैं. वहीं पलटवार करते हुए इजरायल ने ऑपरेशन आयरन स्वॉर्ड शुरू किया, जिसके तहत उसने हमास के कई आतंकियों को मार गिराया या उन्हें बंधक बना लिया. इजरायल की वायुसेना ने हमास के ठिकानों पर ताबड़तोड़ एयरस्ट्राइक कीं, जिसमें उसका कमांडर अयमान यूनिस मारा गया है. 

इजरायली सेना ने हमास के हमले का शिकार हुए हर इजराइली तक पहुंचने के पुख्ता प्लान बनाया है. इस प्लान पर अमल शुरू कर दिया गया है. इसके तहत बंधकों को छुड़ाना, पीड़ितों को उनके परिवारों से मिलाने के अलावा इजराइली नागरिकों के हर अपहरणकर्ता का पता लगाकर उसे सजा देना शामिल है. इसके लिए सेना के मेजर जनरल रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एक विशेष संयुक्त कमांड टीम बनाई गई है. यह टीम अगवा लोगों, उनकी पहचान, और अपहरणकर्ताओं से जुड़ी तमाम जानकारियों को IDF, पुलिस, शिनबेत समेत अन्य एजेंसियों की मदद से जुटाएगी. इसके अलावा लापता लोगों और उनके परिजनों की सहायता के लिए विशेष सहायता केंद्र भी बनाए गए हैं.

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लेकिन हमास ने क्यों किया हमला?

हमास का कहना है कि वह अल-अक्सा मस्जिद की गरिमा के लिए लड़ रहा है. हमास ने कहा, अल-अक्सा की रक्षा के लिए सम्मान, प्रतिरोध और गरिमा की लड़ाई लड़ रहे हैं और कमांडर इन चीफ अबू खालिद अल-दीफ के दिए नाम अल-अक्सा फ्लड के तहत लड़ रहे हैं. ये बाढ़ (फ्लड) गाजा में शुरू हुई है. लेकिन जल्द ही पश्चिमी तट और हर उस जगह तक फैल जाएगी, जहां हमारे लोग मौजूद हैं. तो इस विवाद को समझने के लिए अल-अक्सा मस्जिद और उसके इतिहास को जानना बेहद जरूरी है. 

यरूशलम के इतिहास को जानने के लिए इतिहास के बेहद पुराने पन्ने पलटने होंगे. ईसा मसीह से भी पहले के वक्त में जाना होगा. ईसा मसीह के जन्म से 1000 साल पहले यहूदी राजा सोलोमन ने एक भव्य मंदिर का निर्माण कराया. यहूदी इसे फर्स्ट टेंपल कहकर पुकारते थे. किंग सोलोमन को ईसाई और इस्लाम धर्म में पैगंबर का दर्जा मिला था. लेकिन सोलोमन के बनाए इस मंदिर को बाद में बेबी लोनियन लोगों ने तोड़ दिया. फिर करीब 500 साल बाद 516 ईसा पूर्व में यहूदियों ने इसी जगह पर एक और मंदिर बनवाया. 

तीन धर्मों के लिए बेहद पवित्र जगह

उस मंदिर को सेकंड टेंपल कहा जाता था, जहां यहूदी पूजा करने आया करते थे. यह सेकंड टेंपल 600 साल तक सलामत रहा. लेकिन फिर रोमन ने यहां हमला किया. उन्होंने मंदिर को तोड़ने की कोशिश की. वह टूट भी गया लेकिन पश्चिम की ओर एक दीवार का हिस्सा रह गया. यह दीवार आज भी मौजूद है. इस दीवार के हिस्से को यहूदी वेस्टर्न वॉल कहते हैं. उनके मुताबिक यह उनकी अंतिम धार्मिक निशानी है. यहूदी धर्म को मानने वाले लोग आज भी यहां पूजा करने पहुंचते हैं. इतना ही नहीं, इस दीवार की दरारों में लोग अपनी मनोकामना वाली चिट्ठियां रख देते हैं. 

इसी जगह के अंदर  Holy of the Holies है, जिसको यहूदी अपना सबसे पवित्र स्थान मानते हैं. यहूदी मानते हैं कि इसी जगह से दुनिया का निर्माण हुआ था. लेकिन यह जगह इस्लाम के लिए भी बहुत महत्व रखती है. मुसलमान मानते हैं कि इसी जगह पर पैगंबर इब्राहिम ने अपने बेटे इस्माइल की बलि देने की तैयारी की थी. मुलमान यह भी मानते हैं कि डोम ऑफ द रॉक वो जगह है, जहां से इस्लाम के आखिरी पैगंबर मुहम्मद ने अपनी जन्नत की यात्रा शुरू की थी.  

पैगंबर मोहम्मद के जन्नत जाने के 4 साल बाद यरुशलम पर मुसलमानों ने हमला कर दिया. तब यहां बाइजेंटाइन साम्राज्य का शासन था. तब पवित्र परिसर पर दोबारा मुसलमानों का कब्जा हो गया. आज अल-अक्सा मस्जिद के सामने की ओर एक सुनहरी गुंबद वाली इस्लामिक इमारत, जिसको कहते हैं डोम ऑफ द रॉक. मुसलमानों की डोम ऑफ द रॉक, यहूदियों की वेस्टर्न वॉल और अल अक्सा मस्जिद ये 2 एकड़ के परिसर में ही है. 

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ईसाई भी मानते हैं पवित्र

इसी परिसर में ईसाइयों का भी एक पवित्र चर्च मौजूद है. वह मानते हैं कि इसी जगह पर ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था और फिर उनका पुनर्जन्म हुआ था. हैरत की बात है कि दुनिया के तीन धर्मों की आस्था से जुड़ी इमारतें इस परिसर में मौजूद हैं. 

अगर वक्त में पीछे जाएं तो इन तीनों ही धर्मों के तार आपस में जुड़ते हैं. ये सभी पैगंबर इब्राहिम के मानने वाले हैं इसलिए इनको  अब्राहिमिक रिलीजन कहा जाता है. पैगंबर इब्राहिम को मानने वाले इन तीनों ही समुदायों के लिए यरुशलम एक पवित्र जगह है. जब भी  अल-अक्सा में खून-खराबा हुआ, तब फलस्तीन और इजरायल के बीच मौत का नंगा नाच देखा गया है. 

इसी साल अप्रैल में इजरायली पुलिस अल-अक्सा मस्जिद में घुसी और उसने वहां तोड़फोड़ की. इस दौरान कई लोग घायल भी हुए. इजरायली पुलिस ने कहा कि कुछ नकाबपोश लोग मस्जिद में छिपे हुए थे. उनके पास पत्थर, लाठियां और पटाखे थे, इसलिए उनको मस्जिद के अंदर दाखिल होना पड़ा. तब से ही लोगों को लग रहा था कि कोई न कोई अनहोनी हो सकती है. आज उसी के कारण गाजा और इजरायल जंग की चपेट में है.

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