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'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- अल्पज्ञ, जिसका अर्थ है- थोड़ा ज्ञान रखने वाला या छोटी बुद्धि का। प्रस्तुत है शिवनारायण जौहरी 'विमल' की कविता- तुम्हारा मौन
मैं तुम्हारा मौन पढ़ना चाहता हूँ
अशरीरी, को आकार देकर
परिधान पहिनाना चाहता हूँ
सागर से मणि नभ से
तारे तोड़ लाना चाहता हूँ
वत्स तुम अल्पज्ञ हो
जिसे तुम मौन कहते हो
वह मुखर है अनहद नाद में
गूंगी थी जब शून्य से पैदा हुई
अब परेशान है दुनिया मेरे
मुखर के कोहराम से
फैला अनंत आकाश में
जानता कोई नही
इस मौन में
क्या कितना छिपा है भेद
मनीषियों ने ग्रंथ लिख डाले
मगर भेद खुल पाए नहीं
वह जब चाहता लिख देता
अजंता एलोरा की कहानी
भेज देता है आइस्टीन को
नए भेदों का पिटारा साथ लेकर॥
8 घंटे पहले
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